कोरोना संकट के बीच मोदी सरकार ने बड़ी खुशखबरी दी है। 12 लाख लोगों को रोजगार मिलने की तैयारी हो गयी। 22 भारतीय और इंटरनेशनल कंपनियों सरकार की 41,000 करोड़ रुपये की उत्पादन से सम्बद्ध प्रोत्साहन योजना (PLI Scheme) में दिलचस्पी दिखाई है। कंपनियों ने मोबाइल फोन हैंडसेट के मैन्युफैक्चरिंग का प्रस्ताव पेश किया है। पांच साल में 11 लाख करोड़ की इस स्कीम से भारत में बड़े रोजगार का मौका मिलेगा।

केंद्रीय दूरसंचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने शनिवार को सरकार की पीआईएल स्कीम में बड़े मौके की जानकारी देते हुए बताया कि 22 घरेलू और विदेशी कंपनियों ने पीआईएल स्कीम में दिलचस्पी जताई है। उन्होंने बताया की सरकार को इससे एक लाख करोड़ रुपये के निवेश की उम्मीद है।

उन्होंने कहा कि इस योजना (PLI Scheme) से भारत के करीब 12 लाख रोजगार अवसरों का सृजन होगा। इनमें 3 लाख प्रत्यक्ष, 9 लाख अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर होंगे। इस मौके पर रविशंकर प्रसाद बोले, ‘इनमें करीब 11 लाख करोड़ रुपये के मोबाइल विनिर्माण करने, करीब सात लाख करोड़ रुपये के मोबाइल फोन का निर्यात करने के प्रस्ताव हैं। मैं आवेदन करने वाली कंपनियों का निजी तौर पर शुक्रिया अदा करता हूं।’

जानकारी दी गयी कि कई विदेशी कंपनियों ने भी इसमें रूचि जाहिर की है। इनमें ताइवान, दक्षिण कोरिया, जर्मनी और ऑस्ट्रिया की कंपनियां शामिल हैं। कंपनियों में सैमसंग, फॉक्सकॉन होन हेई, राइजिंग स्टार, विस्ट्रॉन और पेगाट्रॉन का नाम शामिल है। इनमे से कई कंपनियां जैसे फॉक्सकॉन होन हेई, विस्ट्रॉन, पेगाट्रॉन एप्पल आईफोन की मैन्युफैक्चरिंग करते है।

बता दें कि विदेशी कंपनियों के लिए 15,000 रुपये या उससे अधिक कीमत के मोबाइल फोन की मैन्युफैक्चरिंग की शर्त रखी गयी थी, जिससे उन्हें पीआईएल स्कीम का लाभ मिल सके। वहीं भारतीय कंपनियों के लिए ऐसी कोई शर्त नहीं रखी गयी।

इसके अलावा भारत की मोबाइल मैन्युफैक्चरर कंपनियों में लावा, डिक्सन टेक्नोलॉजीस, भगवती (माइक्रोमैक्स), पैजेट इलेक्ट्रॉनिक्स, सोजो मैन्युफक्चरिंग सर्विसेस और ऑप्टिमस इलेक्ट्रॉनिक्स ने PLI के तहत आवेदन किया है।