1971 के युद्ध में पाकिस्तान पर भारत की ऐतिहासिक जीत की स्वर्ण जयंती मनाने वाले 'स्वर्णिम विजय वर्ष विजय ज्वाला' (Golden Victory Torch) को पिछले साल 16 दिसंबर को राष्ट्रीय युद्ध स्मारक, नई दिल्ली से झंडी दिखाकर रवाना किया गया था। पूरे सैन्य सम्मान और धूमधाम के साथ भव्य स्वागत समारोह के बीच 'लौ' नागालैंड (Nagaland) में प्रवेश कर दीमापुर के रंगपहाड़ मिलिट्री स्टेशन पहुंची है।


इससे पहले दिन में 'विजय ज्वाला' सुबह जोरहाट से शुरू होकर दोपहर में दीमापुर पहुंची है। इस 'विजय मशाल' (Golden Victory Torch)के आंदोलन के दौरान विभिन्न स्थानों पर स्थानीय लोगों, बच्चों और नेताओं ने सर्वोच्च बलिदान देने वालों को श्रद्धांजलि देने के लिए आगे आए है।


स्वागत की शुरुआत ईडन अस्पताल से रंगपहाड़ मिलिट्री स्टेशन के भगत स्टेडियम तक अंतिम मील की दौड़ से हुई। भगत स्टेडियम में 'विजय ज्वाला' (Golden Victory Torch) के स्वागत के लिए समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में नागरिक, युद्ध के पूर्व सैनिक, पूर्व सैनिक, वीर नारी, नागरिक गणमान्य व्यक्ति और स्कूली बच्चे उपस्थित थे। कार्यक्रम के दौरान युद्ध के दिग्गजों और वीर नारियों को सम्मानित किया गया।


कार्यक्रम की मुख्य अतिथि '1971-युद्ध शौर्य चक्र' से सम्मानित (दिवंगत) लेफ्टिनेंट कर्नल सिरिल जोनाथन इलियास की पत्नी मंजू इलियास थीं। सम्मान समारोह के बाद मुख्य अतिथि एवं वरिष्ठतम अधिकारी द्वारा वृक्षारोपण किया गया। एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि आगामी दिनों में, '1971 बांग्लादेश मुक्ति युद्ध' पर पुष्पांजलि समारोह, मिनी मैराथन और वृत्तचित्र की स्क्रीनिंग जैसे स्मारक कार्यक्रम रंगपहाड़ सैन्य स्टेशन, दीमापुर में 'स्वर्णिम विजय वर्ष' मनाने के लिए निर्धारित हैं।