बेंगलुरू पुलिस ने नागालैंड के तीन कंप्यूटर प्रोग्रामर को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने कर्नाटक के पूर्व शीर्ष पुलिस अधिकारी शंकर बिदारी की ईमेल आईडी को कथित तौर पर हैक कर लिया था। उनके एक दोस्त से 25,000 रुपये ले लिए। पुलिस ने कहा कि आरोपियों ने विभिन्न बैंकों में 60 से अधिक खाते खोले हैं और उनके पास से बड़ी संख्या में दस्तावेज –रेंट एग्रीमेंट, आधार कार्ड और पैन कार्ड बरामद किए गए।

पुलिस ने कहा कि आरोपी न केवल हैकिंग वेबसाइटों के विशेषज्ञ हैं, बल्कि उन्होंने पूर्वोत्तर राज्यों के बेरोजगार युवाओं को लुभाने के लिए एक नकली ह्यूमन र्सिोस कंपनी भी बनाई थी। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान थिया समोंग, 31 साल, सेरोपा सेसाई, 27 साल और एस्तेर कोन्याक उर्फ रुबिका, 28 साल के रूप में हुई है।

पुलिस ने कहा कि सभी आरोपी नागालैंड के मोन जिले के हैं, लेकिन रुबिका पिछले कुछ सालों से बेंगलुरु में एक ब्यूटी सैलून में काम कर रही थी। मोन जिला म्यांमार की सीमा के पास है। पुलिस ने कहा कि आरोपी कोन्याक जनजाति के हैं, जो टोकरियां, बेंत और बांस का काम, पीतल का काम इत्यादि जैसे हस्तशिल्प कला में बहुत कुशल होते हैं।

पुलिस ने कहा कि ये आरोपी फेसबुक जैसे सोशल मीडिया साइटों पर दो व्यक्तियों- जेम्स और पीटर के संपर्क में आए थे और उनके मार्गदर्शन में उन्होंने इस फिशिंग हमले को अंजाम दिया। वर्तमान में जेम्स और पीटर फरार हैं। पुलिस उपायुक्त, (दक्षिण-पूर्व प्रभाग) श्रीनाथ जोशी ने संवाददाताओं को बताया, “रुबिका रैकेट का चेहरा हुआ करती थी। हाई प्रोफाइल कंपनियों में रोजगार अधिकारी के रूप में खुद को दर्शाती थी। थिया और सेरोपा नागालैंड और अन्य उत्तर पूर्व राज्यों में भोले-भाले बेरोजगार युवाओं से आधार कार्ड और पैन कार्ड जैसे दस्तावेज एकत्र करते थे, जिनका उपयोग यहां बैंक खाते खोलने के लिए किया जाता था।”

पुलिस ने कहा कि साइबर हमले को अंजाम देने के बाद ये आरोपी अलग-अलग खातों में पैसे ट्रांसफर करते थे। “उनकी तौर-तरीके सरल थे, जानी-मानी हस्तियों की ईमेल या सोशल मीडिया साइट आईडी हैक करना। वे सोशल मीडिया साइट्स पर फर्जी प्रोफाइल बनाते थे, फिर वे इन हस्तियों के दोस्तों से वित्तीय मदद लेते थे। पुलिस ने कहा, “वे इन हाईप्रोफाइल लोगों से यह कहते थे कि उनका ‘वीआईपी दोस्त ‘ मुश्किल में है, उनमें से ज्यादातर पैसे ट्रांसफर कर देते थे।”

पुलिस ने कहा कि यह गिरोह कर्नाटक के पूर्व डीजी और आईजीपी शंकर बिदारी के एक फिशिंग हमले का शिकार बनने के बाद सामने आया और पिछले महीने इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई गई थी।