देश में पिछले 5 साल में ऐसे बैंक खातों की संख्या में खासी बढ़ोतरी हुई है जो न केवल महिलाओं के नाम पर है बल्कि जिन्हें वे खुद ऑपरेट करती हैं। पांचवें नैशनल फैमिली हेल्थ सर्वे में यह बात सामने आई है। 10 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 80 से 90 फीसदी महिला खाताधारक खुद ही अपना अकाउंट चलाती हैं। इस सर्वे में 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल किया गया था।

इस सूची में नगालैंड सबसे नीचे है लेकिन वहां भी 63.7 फीसदी महिला खाताधारक खुद ही अपना अकाउंट चलाती हैं। पिछले सर्वे (2015-16) के मुकाबले इस बार इसमें बहुत बड़ा बदलाव आया है। उदाहरण के लिए इस दौरान बिहार में खुद अपना अकाउंट चलाने वाली महिलाओं की संख्या 26.4 फीसदी से बढ़कर 76.7 फीसदी पहुंच गई। कर्नाटक में यह संख्या 59.4 फीसदी से बढ़कर 88.7 फीसदी पहुंच गई। इसी तरह असम में यह 45.4 फीसदी से बढ़कर 78.5 फीसदी और गुजरात में 48.6 फीसदी से बढ़कर 70 फीसदी पहुंच गई।

हालांकि, इस दौरान मोबाइल फोन इस्तेमाल करने वाली महिलाओं की संख्या में काफी तेजी देखने को मिली है। गोवा में यह संख्या 91.2 फीसदी है जबकि गुजरात और आंध्र में 50 फीसदी से थोड़ा कम है। सिक्किम, केरल, लक्षद्वीप, नागालैंड, मिजोरम, लद्दाख और अंडमान एंड निकोबार द्वीप समूह में 80 से 90 फीसदी महिलाएं मोबाइल फोन इस्तेमाल करती हैं।

जहां तक प्रॉपर्टी पर मालिकाना हक की बात है तो इसमें मिलाजुला परिणाम देखने को मिला है। पिछले सर्वे के मुकाबले इस बार कर्नाटक में महिला प्रॉपर्टी ओनर्स की संख्या तेजी से बढ़ी है जबकि असम और बिहार में इसमें गिरावट आई है। लद्दाख में सबसे ज्यादा 72 फीसदी महिलाओं के पास मकान या जमीन का एकल या संयुक्त मालिकाना हक है। इसके बाद कर्नाटक (67.6 फीसदी), तेलंगाना (66.6 फीसदी) और मेघालय (65 फीसदी) का स्थान है। मणिपुर, जम्मू कश्मीर, दादरा, नगर हवेली और दमन एवं दीव में महिला प्रॉपर्टी ओनर्स की संख्या 53 से 58.4 फीसदी है।