पूर्वोत्तर राज्य नगालैंड बॉर्डर पार से हो रही ड्रग्स तस्करी से इन दिनों बुरी तरह जूझ रहा है। सुरक्षाबलों और इंटेलिजेंस एजेंसियों की सतर्कता के बावजूद ड्रग्स तस्कर कोई न कोई तरीका ढूंढ ही लेते हैं। तस्करों ने बीते कुछ सालों में जो तरीका अपनाया है वह बेहद हैरान करने वाला है। म्यांमार बॉर्डर पर सख्ती को देखते हुए तस्करों ने अफीम में भीगे कपड़ों को बैग में सामान्य कपड़ों के बीच रखकर भारत में पहुंचाना शुरू कर दिया है।

 नगालैंड के डीजीपी (बॉर्डर अफेयर्स) रुपिन शर्मा ने ड्रग्स तस्करों के काम करने के इस तरीके को लेकर बड़ा खुलासा किया है। नवभारत टाइम्स ऑनलाइन से बातचीत में रुपिन ने बताया, 'इंडो-म्यांमार बॉर्डर और खासतौर पर नगालैंड के नोकलाक, मोन, किफिरे और त्वेनसांग जिले अफीम और ड्रग्स तस्करी से बुरी तरह जूझ रहे हैं। यहां तस्कर अफीम के घोल में भीगे और सुखाकर लाए गए कपड़े लाते हैं और बेचते हैं।'

उन्होंने बताया, 'एक छोटे से कपड़े के टुकड़े को तस्कर 6-8 छोटे-छोटे (1X2 इंच) के हिस्सों में कर लेते हैं और हर हिस्से को 200-250 रुपये में बेचते हैं। 2 फीट कपड़े का एक टुकड़ा करीब 4500 रुपये में बिकता है। इसे रोकने के लिए एक संयुक्त प्रयास की जरूरत है, साथ ही बॉर्डर के दोनों ओर इसके आदी हो चुके लोगों के रिहैबिलिटेशन की भी व्यवस्था करनी होगी।' दरअसल भारत-म्यांमार बॉर्डर अरुणाचल प्रदेश से लेकर मिजोरम तक करीब 1600 किलोमीटर दायरे में फैला है। दोनों देशों के बीच हुए समझौते के मुताबिक, बॉर्डर के दोनों ओर 16 किमी भीतर तक फ्री मूवमेंट (बिना किसी दस्तावेज के आना-जाना) की इजाजत है। दोनों सरकारों ने यह समझौता साझा संस्कृति और विरासत के चलते किया, मगर इसका फायदा ड्रग्स तस्करों ने बखूबी उठाया है। नतीजा है कि म्यांमार बॉर्डर पर स्थित नगालैंड, मिजोरम और मणिपुर जैसे राज्य ड्रग्स की भीषण समस्या से जूझ रहे हैं।

म्यांमार अफीम की खेती का गढ़ है। यूनाइटेड नेशन ड्रग कंट्रोल प्रोग्राम (UNDCP) और इंटरनैशनल नारकोटिक्स कंट्रोल बोर्ड ने इस इंडो-म्यांमार बॉर्डर के एक बड़े ड्रग्स हब के तौर पर उभरने को लेकर आगाह किया है। बता दें कि भारत और म्यांमार की मिजो, नगा, कूकी जैसी कई जनजातियां बॉर्डर के दोनों ओर भारी संख्या में हैं। यहीं वजह है कि इंडो-म्यांमार बॉर्डर की फेंसिंग नहीं हो पा रही है। साल 2003 में फेंसिंग का काम शुरू भी हुआ तो स्थानीय लोगों के भारी विरोध की वजह से रुक गया। फ्री बॉर्डर का फायदा ड्रग्स तस्करों ने बखूबी उठाया। नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, अरुणाचल के स्थानीय बाजारों में ड्रग्स एंट्री करने के बाद देश के अन्य हिस्सों में भेजी जाती है।

रविवार को ही असम के कार्बी आंगलोंग जिले से 25 करोड़ रुपये की पांच किलोग्राम से अधिक हेरोइन बरामद की गई और एक तस्कर को गिरफ्तार किया गया है। डीजीपी भास्कर ज्योति महंता ने बताया, 'कार्बी आंगलोंग पुलिस ने रविवार रात असम-नगालैंड सीमा पर पांच किलोग्राम से ज्यादा हेरोइन बरामद की।' उन्होंने कहा कि आरोपी इस्माइल अली को हिरासत में ले लिया गया है। उन्होंने कहा कि बरामद की गई 5.05 किलोग्राम हेरोइन की बाजार में कीमत 25 करोड़ रुपये है।