भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के आंकड़ों के अनुसार मेघालय और नागालैंड में 40 प्रतिशत से अधिक आबादी के पास आधार कार्ड नहीं हैं। मेघालल में महज 58.60 फीसदी और नागालैंड में 59.29 फीसदी जनता के पास आधार कार्ड है। वहीं अरुणाचल में 73.29, मणिपुर में 79.95 और लद्दाख में 77.79 फीसदी लोगों के पास आधार कार्ड है। वहीं दिल्ली सहित चार राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों में सौ फीसदी लोगों के पास आधार कार्ड है। 

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मेघालय की बात करें तो यहां की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। 2016 में राज्य की योग्य आबादी में महज 3.6 प्रतिशत लोगों के पास आधार था। बड़ी छलांग 2020 और 2021 के बीच हुई, जब ये आंकड़ा 30.3 से बढ़कर 48.3 प्रतिशत हो गया। मेघालय सरकार के करीबी सूत्रों ने हमें बताया कि सरकार की पहल चल रही है और 2023 तक कम से कम 70 प्रतिशत आबादी को पंजीकृत कराने का लक्ष्य है।

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हालांकि नागालैंड में 2017 में 55 प्रतिशत लोगों के पास आधार कार्ड था। यूआईडीएआई के अनुसार 2018 से 2020 तक दो साल तक ये आंकड़ा 57.2 प्रतिशत रहा। कुछ समय पहले तक बहुत सी सरकारी योजनाओं में असम और मेघालय के लोगों के लिए आधार होना अनिवार्य नहीं था। 2017 में जब राज्य में आधार का आंकड़ा 14 प्रतिशत था, तब मुख्यमंत्री मुकुल संगमा ने कहा था कि उन्होंने आधार कार्ड के लिए आवेदन नहीं किया था। यह स्पष्ट नहीं है कि संगमा के पास अब कार्ड है या नहीं। हालांकि, राज्य के एआईटीसी विधायक जॉर्ज लिंगदोह ने कहा कि उन्हें उनका कार्ड 2020 में ही मिला था।