नागालैंड की सत्तारूढ़ नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (NDPP) ने केंद्र से केंद्रीय गृह मंत्रालय की उस अधिसूचना को रद्द करने की मांग की, जिसमें अगले साल 30 जून तक पूरे राज्य में सशस्त्र बल (विशेष शक्ति) अधिनियम, 1958 (AFSPA) का विस्तार किया गया था।


NDPP का यह कदम क्षेत्र के लगभग सभी राजनीतिक दलों के साथ-साथ नागा नागरिक समाज संगठनों (CSO) द्वारा मोन जिले में सेना द्वारा 14 नागरिकों की हत्या के बाद AFSPA को निरस्त करने की तेज मांग के बाद आया है। 12 विधायकों वाली भाजपा NDPP के नेतृत्व वाली नागालैंड सरकार की सहयोगी है और भगवा दल के विधायक दल के नेता वाई. पैटन उपमुख्यमंत्री हैं।
NDPP ने एक बयान में कहा कि 'ऐसी भाषा' के साथ अधिसूचना और आदेश जारी करना अनुचित है और युवा पीढ़ी की महत्वाकांक्षा और आकांक्षा को नकारात्मक रूप से प्रभावित करेगा, खासकर जब लोग विभिन्न समूहों से जुड़े नगा शांति वार्ता के अंतिम समाधान की उत्सुकता से प्रतीक्षा कर रहे हैं।
इन्होंने बताया कि “नागालैंड पर्यटन और सेवा क्षेत्रों में सकारात्मक विकास के दौर से गुजर रहा है और यह एक लोकप्रिय गंतव्य के रूप में उभरा है। लेकिन अशांत क्षेत्रों के अनावश्यक विस्तार और AFSPA के लागू होने से, आर्थिक विकास और मुख्यधारा के साथ एकीकरण की दिशा में हमारे प्रयास केवल नकारात्मक रूप से प्रभावित होंगे।”
AFSPA के खिलाफ एक जन आंदोलन चल रहा है, नागालैंड विधानसभा ने 20 दिसंबर को एक प्रस्ताव के माध्यम से लोगों की भावनाओं की जोरदार वकालत की, जिसे केंद्रीय गृह मंत्री (अमित शाह) के माध्यम से भारत सरकार को प्रस्तुत किया गया है।