नागालैंड के मोन जिले के ओटिंग में चार और पांच दिसंबर को हुए हत्याकांड (Nagaland Massacre) के बाद राज्य में तनाव अभी भी जारी है। राज्य में विभिन्न स्थानों पर सभाओं और मोमबत्ती की रोशनी में श्रद्धांजलि के रूप में विरोध प्रदर्शन जारी है। पूर्वी नागालैंड के लोग अभी भी इन हत्याओं का विरोध कर रहे हैं और सुरक्षा बलों द्वारा किए गए अपराध के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं। 

नागालैंड के पूर्वी जिलों के छह नागा जनजातियों के एक संघ पूर्वी नागालैंड पीपुल्स ऑर्गनाइजेशन (East Nagaland People Organization) (ईएनपीओ) ने मंगलवार को लॉन्गलेंग शहर में सभी पूर्वी नागालैंड नागरिक समाजों के साथ एक संयुक्त परामर्श बैठक की। इस बैठक में सर्वसम्मति से यह संकल्प लिया गया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जाती और ओटिंग हत्याकांड (otting massacre) के पीड़ितों को न्याय नहीं दिया जाता, भारत के सुरक्षा बलों को सहयोग नहीं दिया जायेगा। 

ईएनपीओ (ENPO) के मीडिया प्रकोष्ठ द्वारा जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार, बैठक चार और पांच दिसंबर को मोन जिले में सुरक्षा बल द्वारा मारे गए 14 निर्दोष नागरिकों की पृष्ठभूमि के खिलाफ आयोजित की गई थी और संकल्प किया गया कि जब तक ओटिंग हत्याकांड (otting massacre) के पीड़ितों को लेकर उनकी मांग पूरी नहीं हो जाती और न्याय नहीं दिया जाता तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। इस दौरान संगठन किसी भी राष्ट्रीय समारोह या ऐसी गतिविधियों से दूर एवं असहयोग रहेगा, सेना के नागरिक कार्यक्रमों में गैर-भागीदारी रहेगा, उनके किसी भी आधिकारिक निमंत्रण में गैर-उपस्थिति और पूर्वी नागालैंड क्षेत्रों के भीतर किसी भी भर्ती अभियान की अनुमति नहीं होगी। 

संयुक्त परामर्श बैठक में यह भी मांग की गई कि हत्याओं में शामिल सुरक्षा बल के कर्मियों पर संबंधित कानून के तहत मामला दर्ज किया जाना चाहिए और मुकदमे को सिविल कोर्ट के तहत लाया जाना चाहिए। बैठक में संसद में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) के ‘आत्मरक्षा’ संबंधी बयान को वापस लेने और सभी पूर्वाेत्तर राज्यों से सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम (अफस्पा) (AFSPA), 1958 को निरस्त करने की भी मांग की गयी। विज्ञप्ति में यह भी कहा गया है कि हत्याओं के विरोध और न्याय की मांग को लेकर 16 दिसंबर को सभी आदिवासी बहुल मुख्यालयों में एक जनसभा आयोजित की जाएगी। बैठक में राज्य सरकार को तुरंत नागालैंड राज्य मानवाधिकार आयोग के गठन के लिए पत्र लिखने का भी संकल्प लिया गया।