नागालैंड सरकार ने अवैध संग्रह को रोकने के लिए अंतर-राज्यीय सीमाओं को छोड़कर सभी पुलिस चेक गेट बद करने का ऐलान किया है। दरअसल भारत सरकार से वार्ता कर रहे नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड (इसाक-मुइवा), एनएससीएन-आईएम सहित कई सशस्त्र समूह व्यापारियों और वाहनों से अवैध संग्रह कर रहे थे। 

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पिछले साल कन्फेडरेशन ऑफ नागालैंड चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (सीएनसीसीआई) ने सरकार से स्पष्ट करने के लिए कहा था कि क्या उसे लगता है कि सशस्त्र समूहों द्वारा करों का संग्रह अवैध है। इसने कहा कि व्यापारिक समुदाय को कम से कम 10 सशस्त्र समूहों को करों का भुगतान करना पड़ता है। यह आदेश नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो के गृह मंत्री अमित शाह से दिल्ली में मिलने के एक दिन बाद आया है, जहां उन्होंने नगा शांति वार्ता को जल्द से जल्द पूरा करने की मांग की थी। नागालैंड में फरवरी 2023 में चुनाव होने हैं। नागालैंड के उपमुख्यमंत्री वाई. पैटन ने हाल ही में एक जनसभाओं में नागा शांति समझौते पर जल्द हस्ताक्षर नहीं होने पर राज्य में राष्ट्रपति शासन की मांग की है। कथित तौर पर एनएससीएन-आईएम के साथ चर्चा नागाओं के लिए अलग झंडा और संविधान की मांग को लेकर अटकी हुई है।

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19 मई को नागालैंड के मुख्य सचिव जे. आलम द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि राज्य सरकार ने पूर्व में अवैध संग्रह को रोकने के लिए कई निर्देश जारी किए थे, लेकिन, हालांकि वाहनों से अवैध रूप से धन की वसूली का आरोप लगाते हुए रिपोर्ट मिली। आदेश में कहा गया है कि नगरपालिका और नगर परिषदों सहित अन्य सरकारी विभागों द्वारा स्थापित किए गए चेक गेटों को भी तुरंत बंद कर दिया जाएगा। आदेश में यह भी कहा गया है कि प्रत्येक जिले में निरीक्षण दल का गठन किया जाना चाहिए जो पुलिस सहित किसी भी चेक पोस्ट को नष्ट करने के लिए सर्वेक्षण करेगा। निरीक्षण दल को इस उद्देश्य के लिए स्थापित हेल्पलाइन पर प्राप्त शिकायतों के आधार पर अवैध कर संग्रह के खिलाफ की गई कार्रवाई पर रिपोर्ट भी भेजनी होगी।