देशभर में लॉकडाउन के बीच दूसरे राज्यों में फंसे मज़दूर अपने राज्यों को पलायन कर रहे है। लॉकडाउन के 50 दिन बाद भी मज़दूरों का संकट ख़त्म नहीं हुआ है। इससे निपटने के लिए केंद्र सरकार ने मज़ूदरों के लिए स्पेशल श्रमिक ट्रेनें चलाई है। सरकार के मुताबिक अब तक देशभर में साढे 6 लाख से ज्यादा प्रवासी मज़दूरों को उनके गृह राज्य पहुंचाया जा चुका है। लेकिन इस बीच कई राज्य ऐसे है जो मज़दूरों से वापस न जाने की अपील कर रहे है तो वहीं पूर्वोत्तर राज्य नागालैंड ने इस संकट से निकलने के लिए नया ऐलान कर दिया है।

नागालैंड सरकार दूसरे राज्यों में फंसे अपने प्रवासी मज़दूरों को 10 हज़ार रुपए की सहायता देगी। हालांकि इसमें ये शर्त रखी गई है कि ये रकम या सहायता उन्हीं म़ज़दूरों को मिलेगी जो वापस राज्य में ना लौटना चाहें या ना लौटे। दरअसल नागालैंड सरकार के पास क्वारंटीन सुविधाओं की कमी है साथ ही राज्य में एक भी कोविड 19 टेस्टिंग सेंटर नहीं है।

ऐसे में सरकार ने कोरोना के प्रसार को न फैलने देने के लिए ये कदम उठाया है। राज्य के मुख्य सचिव तेमजेन तॉय के मुताबिक उन राज्यों में जहां प्रवासी मज़दूर लौट रहे है वहां पिछले दिनों में कोरोना के मामलों में बढ़ोतरी देखी गई है। इसी को देखते हुए सरकार ने ये फैसला लिया। मुख्य सचिव ने बताया कि अब तक 18 हज़ार प्रवासियों  ने नागालैंड वापस लौटने के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने इस प्रवासियों के वापस लौटने के चरणबद्ध इंतज़ाम किए थे, इसके लिए विस्तृत योजना बनाई गई थी। लेकिन फिर केंद्र की तरफ से प्रवासियों के लिए चलाई गई स्पेशन ट्रेनों के चलते मुश्किलें बढ़ गई है। लिहाज़ा राज्य सरकार की चिंता भी बढ़ गई है।


मुख्य सचिव के मुताबिक हालातों को देखते हुए राज्य सरकार ने तय किया कि  सबसे पहले बुजुर्गों और उन लोगों की वापसी को प्राथमिकता दी जाएगी जो इलाज के लिए दूसरे राज्यों में गए थे और वहीं फंस गए।