नागालैंड सरकार (Nagaland government) ने कोविड-19 (Covid-19) महामारी को देखते हुए दुर्गा पूजा (Durga Puja) के उत्सव को सीमित करने संबंधी कुछ दिशा-निर्देश जारी किए हैं। शुक्रवार को जारी इन दिशा-निर्देशों में सरकार ने सिर्फ कंटेनमेंट जोन के बाहर ही पूजा पंडाल को बनाए जाने की अनुमति दी है और इनमें भक्तों को दर्शन करने की अनुमति सुबह के 5 बजे से रात के 9 बजे तक है। 

इसके अलावा, पूजा पंडालों में उनकी क्षमता के हिसाब से आयोजकों सहित अधिकतम 50 फीसदी तक ही लोगों को उपस्थित रहने की अनुमति दी जाएगी और साथ ही इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क पहनना और अन्य मानक संचालन प्रक्रियाओं का पालन करना भी अनिवार्य होगा। कुछ अन्य नियम भी सुझाव गए हैं जैसे मास्क या फेस कवर के बना आयोजकों द्वारा किसी को भी पंडाल में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। 

हाथों को सैनिटाइज करने के बाद ही अंदर आने दिया जाएगा। आयोजकों को इन नियमों का पालन भली-भांति कराए जाने के निर्देश दिए गए हैं। आयोजकों को यह भी बताया गया है कि पंडाल में जाने के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रहे लोग जिस परिसर में उपस्थित रहेंगे, वहां सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान खास तौर पर रखी जाए। 

इसके अलावा, परिसर में स्वयंसेवकों और निजी सिक्योरिटी की भी व्यवस्था हो, जो यह ध्यान रख सके कि लोगों ने मास्क पहन रखा है या नहीं, सोशल डिस्टेंसिंग (Social distancing) का पालन हो रहा है या नहीं। आयोजकों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि पूजा परिसर को दर्शनार्थियों के लिए खोलने से पहले और दिन में हर 6 घंटे में इन्हें बंद करने के बाद पंडाल का सैनिटाइजेशन भी बेहतर तरीके से किया गया है। गाइडलाइन (corona guideline) में आगे कहा गया कि पंडाल में घुसने से पहले लोगों की थर्मल स्कैनिंग (thermal screening) कराई जाएगी और किसी में कोरोना के लक्षण दिखे जाने पर उसे पंडाल में नहीं घुसने दिया जाएगा और इस बारे में निकटतम सरकारी स्वास्थ्य सुविधा केंद्र को जानकारी देनी होगी। 

इसके साथ ही बीमारी से ग्रस्त 65 साल से अधिक उम्र के लोगों, 10 साल से कम उम्र के बच्चों और गर्भवती महिलाओं को पंडाल में आने से बचने के लिए कहा गया है। जिला टास्क फोर्स को संबंधित पूजा कमेटी या आयोजकों के साथ बात कर सभी जरूरी इंतजाम किए जाने का निर्देश दिया गया है ताकि मूर्तियों का विसर्जन बिना किसी भीड़-भाड़ के आराम से हो। इसके अलावा, सुरक्षा और ट्रैफिक की जिम्मेदारी संभालने के लिए जिला पुलिस उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक को अवगत कराया गया है। गाइडलाइन में यह भी कहा गया है कि अगर कोई इन नियमों का उल्लंघन करते हुए पाया गया, तो उसके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।