असम-नगालैंड के बीच सीमा संबंधी तनाव के मद्देनजर नगालैंड विधानसभा ने गुरुवार को 10 सदस्यीय सेलेक्ट कमेटी का गठन किया, जो असम के साथ सीमा विवादों से जुड़े सभी तथ्यों की पड़ताल करेगी। असम-नगालैंड सीमा मुद्दे पर गहन विचार-विमर्श के बाद सदन ने मुख्यमंत्री नेफियो रियो की तरफ से विधानसभा में पेश तीन सूत्रीय प्रस्ताव को सर्वसम्मति से स्वीकार किया। सदन ने समिति को अपनी रिपोर्ट तीन महीने के भीतर सौंपने को कहा है।

समिति की अध्यक्षता मुख्यमंत्री नेफियो रियो करेंगे और इसमें उपमुख्यमंत्री वाई पैटन और नेता प्रतिपक्ष टीआर जिलियांग समेत 10 सदस्य शामिल हैं। सदन ने ये भी प्रस्ताव किया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुद्दों के निपटारे तक विवादित क्षेत्र में यथास्थिति सुनिश्चित किए जाने का अनुरोध किया जाए। विधानसभा ने ये भी निर्णय लिया कि सीमा मुद्दे का निपटारा दोनों राज्य सरकारों की तरफ से अदालत के बाहर ही किया जाना चाहिए।

अंतरराज्यीय सीमा के 500 किलोमीटर से अधिक हिस्से को शेयर करने वाले दोनों राज्यों के बीच साल 1963 से टकराव जारी है। लगातार मुद्दे को हल करने के लिए अतीत में दोनों राज्यों की सरकारों की तरफ से किए गए कई प्रयास विफल रहे हैं और बाद में असम इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में ले गया।

सुप्रीम कोर्ट ने भी 2010 में मध्यस्थता के माध्यम से विवाद को सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझाने का प्रयास किया, लेकिन मध्यस्थों की तरफ से पेश की गई रिपोर्ट को दोनों राज्यों ने खारिज कर दिया। फिर 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने दोनों राज्यों को कोर्ट के रजिस्ट्रार के पास हलफनामे के रूप में अपने गवाहों की लिस्ट दाखिल करने का आदेश दिया। लेकिन ये बताया गया है कि कोरोना महामारी के कारण इसकी प्रगति ठप है।