म्यांमार (Myanmar) के लोगों का भारत में शरण लेना जारी है क्योंकि पड़ोसी देश में सेना ने फरवरी में तख्तापलट (military coup) कर सत्ता पर कब्जा कर लिया था। इस बीच नागालैंड (Nagland) के राज्य मंत्री नीबा क्रोनू ने कहा कि म्यांमार (Myanmar) के साथ सीमा साझा करने वाले पूर्वोत्तर के चार राज्यों में से एक नागालैंड (Nagland) म्यांमार (Myanmar) के नगाओं का आश्रय स्थल बन गया है। म्यांमार (Myanmar) में नागा लोग ज्यादातर सागिंग क्षेत्र और काचिन राज्य से हैं। उन्होंने कहा कि म्यांमार (Myanmar) से कितने शरणार्थी नागालैंड (Nagland) आए हैं, इसका आकलन किया जा रहा है। उनमें से ज्यादातर सोम जिले में घुस गए हैं।

क्रोनू ने कहा कि ये “हमारे अपने (नागा) लोग हैं” और कहा कि नागरिक समाज और चर्च संगठन मानवीय आधार पर उन्हें सहायता प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘हमें अभी तक राज्य में आने वाले लोगों की सही संख्या का पता लगाना है। हम जल्द ही इस पर फैसला लेंगे।’ मार्च के बाद से लगभग 13000 शरणार्थी ज्यादातर चिन राज्य से शरण लेने के लिए मिजोरम में घुस चुके हैं।

इस महीने की शुरुआत में संयुक्त राष्ट्र महासभा में पेश एक रिपोर्ट में महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने बताया था कि एक फरवरी के सैन्य तख्तापलट के बाद से म्यांमार (Myanmar) के 15000 से अधिक लोगों के भारत में सीमा पार करने का अनुमान है। भारत, म्यांमार (Myanmar) के साथ 1600 किलोमीटर से अधिक की बिना बाड़ वाली और जमीनी सीमा के साथ बंगाल की खाड़ी में समुद्री सीमा को भी साझा करता है। पूर्वोत्तर के चार राज्य अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, मणिपुर और मिजोरम म्यांमार (Myanmar) के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करते हैं।

म्यांमार (Myanmar) में फरवरी के बाद से पूरे देश में तनाव बढ़ा। साल 2015 के राष्ट्रव्यापी युद्धविराम समझौते के तहत आने वाले उन क्षेत्रों में भी तनाव बढ़ गया, जहां एक फरवरी से पहले सापेक्ष शांति थी। एक फरवरी को म्यांमार (Myanmar) सेना ने तख्तापलट कर आंग सान सू ची, राष्ट्रपति यू विन मिंट समेत देश के शीर्ष नेताओं को हिरासत में ले लिया था। रिपोर्ट में कहा गया था, ‘थाईलैंड, चीन और भारत के साथ लगती सीमाओं पर ज्यादातर राज्यों और क्षेत्रों में तातमाडॉ, जातीय सशस्त्र संगठनों और नवगठित असैन्य रक्षा बलों के बीच सशस्त्र संघर्ष शुरू हो गए हैं, जिससे इस संकट के क्षेत्रीय प्रभावों और बड़े पैमाने पर संभावित सशस्त्र संघर्ष को लेकर चिंता बढ़ रही है।’ रिपोर्ट में कहा गया कि रोहिंग्या बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर को पार कर जोखिम भरी यात्रा करना जारी रखे हुए हैं।