देश के पांच राज्यों में 45 फीसदी से भी कम परिवारों के पास खाना बनाने के लिए स्वच्छ ईंधन (एलपीजी, पीएनजी, बिजली और बायोगैस) की उपलब्धता है। इनमें बिहार और पश्चिम बंगाल शामिल हैं। यह बात 17 राज्यों और पांच केंद्र शासित प्रदेशों में कराए गए नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (एनएफएचएस) के ताजा डाटा से सामने आई है।

एनएफएचएस डाटा के मुताबिक, असम में 42.1 फीसदी, बिहार में 37.8 फीसदी, मेघालय में 33.7 फीसदी, नगालैंड में 43 फीसदी और पश्चिम बंगाल में 40.2 फीसदी परिवारों के पास ही स्वच्छ ईंधन उपलब्ध है। एनएफएचएस-5 (2019-20) के दौरान 6.1 परिवारों से जनसंख्या, स्वास्थ्य, परिवार नियोजन और पोषण संबंधी इंडिकेटर्स के आधार पर जानकारी जुटाई गई थी। डाटा के मुताबिक, स्वच्छ ईंधन के उपयोग में सबसे आगे गोवा है, जहां 96.5 फीसदी परिवार इस सुविधा का उपयोग कर रहे हैं।

गोवा के अलावा आंध्र प्रदेश (83.6 फीसदी), मिजोरम (83.8 फीसदी) और तेलंगाना (91.8 फीसदी) राज्य भी इस सूची में अव्वल हैं। हालांकि सर्वे में यह भी सामने आया कि 2015-16 में कराए गए एनएचएफएस-4 के मुकाबले इन 22 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में स्वच्छ ईंधन के उपयोग में बढ़ोतरी हुई है। सर्वे में यह भी सामने आया कि तकरीबन सभी परिवार आयोडीन युक्त नमक का सेवन कर रहे हैं।

सर्वे में सामने आया कि 16 राज्यों की 70 फीसदी से ज्यादा जनसंख्या ऐसे परिवारों में रहती है, जो बेहतर स्वच्छता सुविधाओं का उपयोग करते हैं। इनमें लक्षद्वीप (99.8 फीसदी) और केरल (98.7 फीसदी) में सबसे ज्यादा जनसंख्या इस श्रेणी में आती है, जबकि बिहार (49.4 फीसदी) और लद्दाख (42.3 फीसदी) का हाल सबसे ज्यादा खराब है।

सर्वे में यह भी सामने आया कि 90 फीसदी से ज्यादा जनसंख्या बिजली सुविधा वाले परिवारों में रहती है और 70 फीसदी से ज्यादा को उन्नत पेयजल स्रोतों का लाभ उपलब्ध है।

एनएफएचएस-5 के पहले चरण में शामिल 17 राज्यों व 5 केंद्र शासित प्रदेशों में असम, बिहार, मणिपुर, मेघालय, सिक्किम, त्रिपुरा, आंध्र प्रदेश, अंडमान व निकोबार द्वीप समूह, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, कर्नाटक, गोवा, महाराष्ट्र, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, मिजोरम, केरल, लक्षद्वीप, दादरा नागर हवेली और दमन व दीव शामिल हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, सर्वे का दूसरा चरण शेष बचे राज्यों में चलाया जाएगा, जिसका डाटा अगले साल जारी किया जाएगा।