भारत में कोरोना वायरस के फैलने का सबसे बड़ा कारण देश में कम टेस्ट किट की उपलब्धता को माना जा रहा है। देश में कम कोरोना टेस्ट होने के कारण ही अब तक कोरोना मामलों की धीरे-धीरे पहचान की जा रही है। एक अनुमान के मुताबिक अगर भारत में भी कोरोना टेस्टिंग चीन के आधार पर की जाए तो शायद भारत में भी लाखों की संख्या में कोरोना पॉजिटिव लोग मिल सकते हैं।


भारत में अभी तक कितने लोगों की टेस्टिंग की गई है, किस तरह से की कई है और कहां-कहां किस राज्य में कितनी टेस्टिंग की जा चुकी है इस बारे में अभी कोई सही आंकड़ा सामने नहीं आया है लेकिन हालिया एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हर दस लाख लोगों पर कोरोना टेस्टिंग (प्रति मिलियन परीक्षण) 105 के करीब है।


बताया जाता है कि क्योंकि भारत के पास कोई केंद्रीय भंडारण नहीं है इसलिए टेस्टिंग के पैमाने क्या है। ये बताना मुमकिन नहीं है लेकिन दैनिक स्वास्थ्य बुलेटिन, कुछ न्यूज़ रिपोर्ट्स और ओपन सोर्स प्लेटफार्म से मिली जानकारी के अनुसार कुछ आंकड़े एकत्र किए गये हैं। इनमें भारत के कुछ स्टेट को छोड़ा गया है जिनमें तेलंगाना, लद्दाख और पुड्डुचेरी शामिल हैं।


इसमें श्रेणी नंबर 1 में उन राज्यों को रखा गया है जिनकी जनसंख्या 5 लाख से 75 लाख तक या उसके बीच है। इसमें सिक्किम, नगालैंड, मिजोरम, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश। त्रिपुरा, चंडीगढ़, गोवा, अंडमान और निकोबार, हिमाचल प्रदेश को शामिल किया गया है।


श्रेणी नंबर 2 में उन राज्यों को रखा गया है जिसकी आबादी 1 करोड़ 10 लाख से 3 करोड़ 70 लाख तक या उसके बीच है, इसमें उत्तराखंड, झारखंड, असम, जम्मू और कश्मीर, हरियाणा, छत्तीसगढ़, पंजाब, दिल्ली, केरल शामिल हैं।

श्रेणी नंबर 3 में उन राज्यों को रखा गया है जिनकी जनसंख्या 4 करोड़ 30 लाख से 23 करोड़ तक है या उसके बीच है, इनमें पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र को शामिल किया गया है।

टेस्टिंग के परिणाम

श्रेणी नंबर 1
इसमें आबादी के हिसाब से अंडमान निकोबार की आबादी कम है और कंडीशन काफी सही है। जबकि चंडीगढ़ और हिमाचल को अपने टेस्ट बढ़ाने की जरूरत है।

श्रेणी नंबर 2
इस श्रेणी में केरल और दिल्ली हैं। केरल में तेजी से मामले सामने आए लेकिन अब उन पर लगाम लग चुकी है जबकि दिल्ली में बढ़िया टेस्टिंग के बाद भी मामले लगातार सामने आ रहे हैं। वहीँ, झारखंड और असम जैसे राज्यों का टेस्टिंग पर मिलियन काफी खराब है। इसलिए इन्हें अपने टेस्टिंग संख्या को बढ़ाना होगा। वहीँ दिल्ली में प्राइवेट टेस्ट सेण्टर भी हैं इसलिए वहां और तेजी से टेस्टिंग बढ़ाने होंगे ताकि मामले जल्दी सामने आयें।

श्रेणी नंबर 3
राजस्थान में टेस्टिंग के अच्छे आंकड़े हैं। इसके बाद महाराष्ट्र, जबकि अन्य राज्य टेस्टिंग पर मिलियन (टीपीएम) को लेकर बहुत नीचे हैं। वहीँ, तमिलनाडु को अपना टेस्टिंग बढ़ाना होगा। साथ ही पश्चिम बंगाल को भी अपनी आबादी को देखते हुए टेस्टिंग को जल्द बढ़ाना होगा।