नागालैंड घटनाक्रम (Nagaland Firing case) के बारे में गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने आज लोकसभा में पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारतीय सेना (Indian Army) को नगालैंड में तिरु गांव के पास उग्रवादियों  (militants in nagaland) की आवाजाही की सूचना मिली थी। इसके आधार पर कमांडो दस्‍ते ने 4 दिसंबर की शाम को एम्‍बुश लगाया था। इस दौरान एक वाहन वहां से गुजरा। उसे रुकने का इशारा और प्रयास किया गया। रुकने बजाय वाहन वहां से तेजी से निकले की कोशिश करने लगा। इस आशंका पर कि वाहन में संदिग्‍ध विद्रोही जा रहे थे, वाहन पर गोली चलाई गई, जिससे वाहन में सवार 8 व्‍यक्तियों में से 6 की मृत्‍यु हुई। बाद में यह गलत पहचान का मामला पाया गया। जो दो लोग घायल हुए थे, उन्‍हें सेना ने इलाज हेतु नजदीकी अस्‍पताल में ले जाया गया।

शाह ने बताया, यह समाचार प्राप्‍त होने के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने सेना की टुकड़ी को घेर लिया। दो वाहनों को जला दिया और उनपर हमला किया। इसके परिणामस्‍वरूप सुरक्षा बल के एक जवान की मृत्‍यु हो गई तथा कई अन्‍य जवान घायल हो गए। अपनी सुरक्षा में तथा भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षा बलों को गोली (Nagaland Firing case) चलानी पड़ी जिससे सात और नागरिकों की मृत्‍यु हो गई तथा कुछ और लोग घायल हो गए। उन्‍होंने कहा कि अभी स्थिति तनावपूर्ण मगर नियंत्रण में बनी हुई है।

वहीं विपक्षी दलों ने सोमवार को भारत-म्यांमार सीमा के पास नागालैंड के मोन जिले में गोलीबारी में 14 नागरिकों (Nagaland Firing case) और एक सैनिक के मारे जाने के मुद्दे को सदन में उठाया। राज्यसभा में विपक्ष ने कहा गृह मंत्री सिर्फ पीड़ा व्यक्त करके पीछा नहीं छुड़ा सकते। इस मुद्दे पर विपक्षी दलों ने संसद परिसर में एक बैठक भी की। जिसमें करीब 16 दलों की ओर दोनों सदनों में इस मुद्दे को उठाने की सहमति बनी। इसके साथ ही राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) सांसद मनोज झा और कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी (Congress MP Adhir Ranjan Chowdhury), के सुरेश और गौरव गोगोई ने स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया।

वहीं विपक्षी दलों की बैठक के बाद राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे (Mallikarjun Kharge) ने नगालैंड में हुई गोलीबारी का जिक्र करते हुए कहा कि यह अत्यंत गंभीर घटना है और गृह मंत्री को इस पर सदन में बयान देना चाहिए। गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) सिर्फ पीड़ा व्यक्त करके नहीं छुड़ा सकते। मोदी सरकार के शासन में, उत्तर-पूर्व में उथल-पुथल में वृद्धि देखी गई है। केंद्र सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पीडि़तों को न्याय मिले। वहीं राज्यसभा में कांग्रेस नेता आनंद शर्मा (Anand Sharma) ने इस मसले पर एक ईमानदार और खुली जांच की मांग करते हुए कहा कि सरकार को संसद में इस घटनाक्रम पर बयान देना चाहिए। यह दुखद और खेदजनक है। ऐसा कभी नहीं होना चाहिए था। लोकतंत्र में यह अस्वीकार्य है।