कोरोनावायरस महामारी में संक्रमण के प्रकोप को फैलने से रोकन के लिए लोगों को क्वारंटीन सेंटर मे भेजा जाता है।  क्वारंटीन सेंटर में लोगों को लंबे समय तक अकेले रहना पड़ता है। खास कर नागालैंड में प्रोटकॉल के तहत जो लोग यात्रा कर के आए हैं उन्हें क्वांरटीन के दो चरणों से गुजरना पड़ता है। पहले चरण में कोहिमा और दीमापुर इंस्टीट्यूशनल क्वारंटीन में 14 दिन के लिए रहना होता है। इसके बाद उन्हें गृह जिला के क्वारंटीन सेंटर में 14 दिन के लिए रखते हैं।

ऐसे हालात में नागालैंड फेक जिला के चिजामी गांव में लोगों की बोरियत को दूर करने के लिए क्वारंटीन सेंटर को क्रिएटिव हब में बदल दिया गया है। पटकई क्रिश्चियन कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर वेरथस्थी थोपी ने कहा, ‘हम इसे कोविड-19 क्वारंटीन सेंटर नहीं बल्कि कोविड-19 क्रिएटिव हब कहते हैं। ”

थोपी के अनुसार, चिजामी गांव में पहला बैच आने के दस दिन पहले तक यानी के 25 मई तक केवल 24 घर बने हुए थे। चिजामी एक छोटा हिल स्टेशन है जहां करीब  3000 लोग रहते हैं। उन्होंने बताया कि जीएम सरकारी हाई स्कूल के फुटबॉल ग्राउड के अदंर आते ही सेंटर पर बड़ा- बड़ा  कोविड-19 क्रिएटिव हब लिखा हुआ है। उन्होंने कहा, हम वापस आए लोगों को होम क्वारंटीन का ऑप्शन देते है, लेकिन हमारे गांव में ज्यादातर घरों में क्वारंटीन होने की फैसलिटी नहीं होती है। इसी के चलते हमने इस सेंटर को बनाया, जिसमें हम खुद बैम्बू से घर बनाते हैं।

नागालैंड में मार्च के महीने से लॉकडाउन लागू है। जिला स्तर की कोविड-19 (Covid-19) टास्क फोर्स इस महामारी में सरकार के प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मिल कर काम कर रही है। सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि हर जिले की टास्क फोर्स को सब डिवजन टास्क फोर्स में बांटा गया है। स्टेट के आला कमान के अधिकारी जिला मुख्यालय और टास्क फोर्स से रोजना की अपडेट लेते हैं।

थोपी ने बताया कि हमारा मुख्य काम क्वारंटीन में रह रहे लोगों की देखभाल करना होता है। उन्होने आगे कहा विलेज काउंसिल नार्थ ईस्ट नेटवर्क नाम की संस्थान के साथ जुड़ा हुआ है, जो लोगों को रिलीफ किट, सूखा राशन जैसे चायपत्ती, चीनी आदि देता है। इसी के साथ स्टेशनरी का सामान भी दिया जाता है। उन्होंने कहा कि ये सभी युवा हैं, हम चाहते है कि जिसमें भी इनकी रूचि हो चाहें वो कविताएं लिखना और पेंटिग बनाना वो ये काम करें। अगर वो चाहें तो अपने काम नेन (NEN) को सौंप सकते हैं। क्वारंटीन के बाद हम उनके काम को अपने बुक लेटर में पब्लिश करेंगे।

थोपी ने कहा कि हमारा मकसद उनसे कोई मुश्किल काम करवाना नहीं है बस वो अपने घरों को अदंर रह कर खुद को बिजी रखे। चाहे कविता हो या कोई पेटिंग और मोटिवेटेड रहे। अगर वो चाहें तो अपने घर के बाहर के कुछ हिस्से में गार्डनिंग भी कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि फिलहाल हमारे सेंटर में 9 लोग हैं। नागालैंड में कोरोनावायरस के 341  मामले है। फिलहाल चिजामी गांव में एक भी केस नहीं हैं।