नगालैंड में अगले साल के शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राज्य के पूर्वी हिस्से को अलग कर नया राज्य बनाने की मांग तेज गई है। इसी कड़ी में क्षेत्र के 20 विधायकों ने भी मांग पूरी नहीं होने तक किसी चुनाव में हिस्सा नहीं लेने के आह्वान का समर्थन कर दिया है। पूर्वी नगालैंड के अंतर्गत छह जिले-मोन, तुएनसांग, किफिरे, लोंगलेंग, नोकलाक और शामाटर आते हैं। इन जिलों में सात जनजातियों-चांग, खियामनिंगन, कोन्याक, फोम, संगतम, तिखिर और यिमखिउंग के लोग रहते हैं।

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वही, क्षेत्र के प्रभावी संगठन ईस्टर्न नगालैंड पीपुल्स ऑर्गेनाइजेशन (ईएनपीओ) ने नेताओं, सातों जनजातियों के निकायों और क्षेत्र के अन्य संगठनों के साथ 26 अगस्त को दिमापुर में बैठक की थी, जिसमें संकल्प लिया गया कि वे किसी भी चुनाव में तब तक शामिल नहीं होंगे, जब तक कि उनकी अलग ‘फ्रंटियर नगालैंड’ राज्य बनाने की मांग को स्वीकार नहीं कर लिया जाता। 

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ईस्टर्न नगालैंड लेजिस्टेटर्स यूनियन में भू संसाधन के सचिव और सलाहकार सी एल जॉन ने कहा, क्षेत्र के 20 विधायक लोगों की इच्छा के विपरीत नहीं जा सकते। अलग राज्य के गठन की मांग जन आंदोलन है और हम लोगों के साथ हैं। नगालैंड पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) के विधायक जॉन ने कहा कि वर्ष 2010 से ही अलग राज्य बनाने की मांग को लेकर आंदोलन चल रहा है और ईएनपीओ ने कई मौंको पर केंद्र को इस संदर्भ में ज्ञापन सौंपा है। जॉन ने दावा किया कि लोग केंद्र द्वारा इस संबंध में कोई जवाब नहीं दिए जाने से आक्रोशित हैं।