NSCN (I-M) ने कहा कि भारत सरकार झंडे और संविधान पर एक अलग बात करके गलत संकेत भेज रही है जो फ्रेमवर्क समझौते के साथ सहमत नहीं है। इसी के साथ फ्रेमवर्क समझौते ने नागा ध्वज और संविधान पर अलग से बात करने की कोई गुंजाइश नहीं दी है। सूचना और प्रचार मंत्रालय द्वारा जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि यह समझा जाना चाहिए कि फ्रेमवर्क समझौता अद्वितीय इतिहास की बात करता है।


सूचना और प्रचार मंत्रालय नागा लोगों और उनकी संप्रभु स्वतंत्रता की पहचान ध्वज और संविधान को स्वीकार करता है। इसी के साथ केंद्र को फ्रेमवर्क समझौते से अपनी प्रतिबद्धता को वापस नहीं लेना चाहिए और जिस पर सहमति दी गई है, उसे विकृत करके दिया गया है। NSCN (I-M) संगठन ने बयान जारी करते हुए कहा कि यह फ्रेमवर्क एग्रीमेंट पर गहराई से ध्यान केंद्रित करने के लिए एक बाहरी चिंता का विषय बन गया है। जो कि भारत सरकार के साथ बातचीत का ध्यान अब मुख्य रूप से नागा ध्वज और संविधान पर है।


यही नहीं NSCN (I-M) ने आरोप लगाया कि नागालैंड के राज्यपाल के रूप में तत्कालीन वार्ताकार स्टिकिंग पॉइंट फ्रेमवर्क एग्रीमेंट के साथ कुल विरोधाभास में है, रवि ने संसदीय स्थायी समिति को एक भ्रामक रिपोर्ट दी है। जो कि ऐसी रिपोर्टें जो NSCN की बातचीत करने वाली टीम के साथ किसी भी समझौते से नहीं जुड़ी हैं, अब भारत-नागा राजनीतिक वार्ता में व्यथा का स्रोत बन गई हैं। इसने 11 जुलाई, 2002 को भारत सरकार द्वारा नागाओं के अद्वितीय इतिहास और स्थिति की पहचान को भारत-नागा राजनीतिक वार्ता में एक राजनीतिक मील का पत्थर बताया।