नागालैड (Nagaland) में वर्षा के पैटर्न में बदलाव आया है इसके कारण वहां सूखे जैसे हालात उत्पन्न  हो गये हैं. इसके कारण किसानों की चिंता बढ़ गयी है. खास कर धान किसान खासे चिंतित है. क्योंकि नागालैंड में धान का उत्पादन (Paddy production in Nagaland) ज्यादातर स्व-उपभोग के लिए किया जाता है. पहाड़ी राज्य में लगातार सूखे जैसी स्थिति के कारण बुरी तरह प्रभावित हुआ है. इससे किसानों और उनके परिवारों में खलबली मच गई है. 

इस क्षेत्र में वर्षा के पैटर्न में काफी बदलाव आया है, और राज्य सूख रहा है. इस साल कम बारिश के कारण यह सूखे जैसी स्थिति का सामना कर रहा है. धान के किसान सेई कुओत्सु (35) ने कहा की यहां के अधिकांश घरों में पानी जमा करने की कोई व्यवस्था नहीं है और वे अपने खेतों में पानी की आपूर्ति के लिए नदियों और नालों पर निर्भर हैं. लेकिन जलाशय सूख गए हैं. धान की बुवाई जून में शुरू होती है. इसकी कटाई नवंबर में की जाती है. लेकिन अधिकांश किसान वर्षा की कमी के कारण बुवाई नहीं कर सके थे.

डाउन टू अर्थ के मुताबिक कोहिमा जिले (Kohima) के झदमिया गांव में अपनी दो एकड़ जमीन में धान उगाने वाले केडिलेजो मकेबित्सु  ने कहा कि मैं पिछले कई सालों से धान उगा रहा हूं, लेकिन इस तरह की स्थिति पहले कभी नहीं देखी. मकेबित्सु हर साल खुद के खाने के लिए  लगभग 1,000 किलोग्राम धान की कटाई करते है, क्योंकि उत्पादन बाजार में बिक्री के लिए पर्याप्त नहीं है. “लेकिन इस साल, नियमित उपज का आधा भी काटना मुश्किल है.

कुओत्सु ने भी इसी तरह की चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हम धान पर बहुत अधिक निर्भर हैं. वर्षा आधारित फसल साल में सिर्फ एक बार उगाई जाती है और कई महीनों तक चलती है. दोनों ने दावा किया कि अकेले झाडिमा में खेती से जुड़े लगभग 800 परिवार कठिन समय का सामना कर रहे हैं. दरअसल, पूरा राज्य इस साल भीषण सूखे जैसी परिस्थितियों से जूझ रहा है. नागालैंड कृषि विभाग के अनुसार, राज्य के 12 जिलों में फैले 66,222 परिवार प्रभावित हुए हैं. प्रभावित भूमि का कुल क्षेत्रफल लगभग 49,448.85 हेक्टेयर है. दीमापुर जिला सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है यहां 9,408 घर और 14,995 हेक्टेयर भूमि बुरी तरह प्रभावित हुई है. किसानों ने कहा कि दलहन, सब्जियां, तिलहन और कद्दू को भी पानी के संकट का सामना करना पड़ा है.  पहाड़ी राज्य के किसानों को भी इस साल की शुरुआत में फॉल आर्मीवर्म (FAW) के भारी प्रकोप का सामना करना पड़ा, जिसने 334 गांवों को कवर करते हुए लगभग 3048.45 हेक्टेयर मक्के की फसल को प्रभावित किया.

कोहिमा जिले के एक किसान केनी वेली  ने कहा की वर्षा की कमी ने धान की गुणवत्ता को भी प्रभावित किया है. राजा मिर्च सूखे के कारण क्षतिग्रस्त हो गई. हमें सरकार से कोई मुआवजा नहीं मिला है. नागालैंड का कुल क्षेत्रफल 16,579 वर्ग किलोमीटर है, जिसमें से 947 वर्ग किलोमीटर में झूम खेती होती है. राज्य के कृषि विभाग के अनुसार, देरी से हुई बारिश ने लगभग 915 गांवों को प्रभावित किया है, जिसमें 686.62 वर्ग किलोमीटर  झूम खेत और 5.25 वर्ग किलोमीटर बागवानी फसलें शामिल हैं. झूम के अलावा , सीढ़ीदार चावल की खेती (ऊपरी) और गीली सीढ़ीदार चावल की खेती भी प्रभावित हुई है. राज्य ने 2020 में 551,000 टन चावल का उत्पादन किया; इस साल इसके लगभग 166,000 टन होने की उम्मीद है. वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने माना कि राज्य कृषि संकट की ओर बढ़ रहा है और केंद्र सरकार से इस मामले को देखने का आग्रह किया.

नागालैंड (Nagaland) के कृषि उत्पादन पदाधिकारी ने कहा कि हम पानी की कमी और जलवायु परिवर्तन की दोहरी समस्याओं का सामना कर रहे हैं. हमें अभी कृषि को हुए कुल मौद्रिक नुकसान का आकलन करना है क्योंकि कटाई दिसंबर तक जारी रहेगी. हम मानते हैं कि खेती का हमारा पारंपरिक तरीका अब आर्थिक रूप से व्यवहार्य और पारिस्थितिक रूप से टिकाऊ नहीं है. उन्होंने कहा कि  हमारे राज्य की भौगोलिक स्थिति अन्य राज्यों से अलग है. हम गंभीर जल संकट से जूझ रहे हैं, लेकिन कृषि उपज को दोगुना करने का सवाल ही नहीं उठता. केंद्र सरकार (central government) को चेक डैम और जलाशयों के निर्माण पर अधिक ध्यान देना चाहिए.