केंद्र सरकार ने नागालैंड के विद्रोही संगठनों के साथ संघर्ष विराम की अवधि एक वर्ष के लिए बढ़ा दी है। गृह मंत्रालय ने बुधवार को एक वक्तव्य जारी कर कहा कि केंद्र सरकार और नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड खापलांग (एनएससीएनएनके), नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड रिफॉर्मेशन ( एनएससीएनआर) तथा नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड खांगों ( एनएससीएन खांगो) के साथ संघर्ष विराम समझौता लागू है। 

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वक्तव्य में कहा गया है कि एनएससीएन-के और एनएससीएन-आर के साथ इस संघर्ष विराम की अवधि आगामी 28 अप्रैल से 27 अप्रैल 2023 तक एक वर्ष के लिए बढ़ाई जा रही है। एक अन्य नागा संगठन एनएससी खांगो के साथ हुए समझौते के अनुसार संघर्ष विराम की अवधि गत 18 अप्रैल से 17 अप्रैल 2023 तक बढ़ाई गई है। संघर्ष विराम की अवधि बढ़ाने के समझौतों पर मंगलवार को हस्ताक्षर किए गए थे। 

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आपको बता दें कि नागालैंड में 1950 के दशक से सशस्त्र संघर्ष चल रहा है। इस आंदोलन की मांग है कि नगा लोगों का अपना संप्रभु क्षेत्र हो। इसमें नगालैंड के अलावा उसके पड़ोसी राज्यों असम, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश के साथ-साथ म्यांमार के नगा-आबादी वाले सभी इलाक़े भी शामिल हों। 1975 में एक समझौते के बाद सबसे बड़े नगा विद्रोही गुट 'नगा नेशनल काउंसिल' ने आत्मसमर्पण कर दिया था। लेकिन एक दूसरे गुट 'नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड (एनएससीएन) ने उस समझौते की निंदा करते हुए लड़ते रहने का फ़ैसला किया। एनएससीएन में चीन से प्रशिक्षण और हथियार पाने वाले लड़ाके शामिल थे।