केंद्रीय कैबिनेट ने अगले साल मार्च में होने वाली अगले दौर की स्पेक्ट्रम नीलामी को बुधवार को मंजूरी दे दी। इसमें कुल 2,251 मेगाहर्ट्ज फ्रीक्वेंसी की बिक्री की जाएगी, जिसकी कुल कीमत 3.92 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा होगी। हालांकि, इसमें 5जी सेवाओं के लिए चिह्नित स्पेक्ट्रम फ्रीक्वेंसी की नीलामी नहीं होगी।

दूरसंचार एवं आईटी मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने बुधवार को कहा कि सरकार 700 मेगाहर्र्ट्ज, 800 मेगाहर्ट्ज, 900 मेगाहर्ट्ज, 2,100 मेगाहर्ट्ज, 2,300 मेगाहर्ट्ज और 2,500 मेगाहर्ट्ज के फ्रीक्वेंसी बैंड में 2,251 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम को बेचेगी। आवेदन आमंत्रित करने के लिए इसी महीने नोटिस जारी किया जाएगा, जबकि इसकी नीलामी मार्च, 2021 तक होगी।

दूरसंचार विभाग के निर्णय लेने वाले शीर्ष निकाय डिजिटल संचार आयोग ने मई में 5.22 लाख करोड़ रुपये की स्पेक्ट्रम नीलामी योजना को मंजूरी दी थी। इसमें 5जी सेवाओं के लिए चिह्नित रेडियोवेव्स बेचने की बात भी शामिल थी। प्रसाद ने कहा, पिछला स्पेक्ट्रम आवंटन चार साल पहले हुआ था। इसलिए चार साल बीत जाने के कारण उद्योग इसकी जरूरत महसूस कर रहा था। अगली स्पेक्ट्रम नीलामी की शर्तें 2016 की नीलामी की तरह ही रहेंगी। हालांकि, उन्होंने इस बारे में कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी। उधर, रिलायंस जियो का कहना है कि 3.92 लाख करोड़ मूल्य का स्पेक्ट्रम बिना किसी इस्तेमाल के नीलामी के लिए पड़ा है।

दूरसंचार मंत्रालय को दूरसंचार परिचालकों से स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क के रूप में औसतन पांच फीसदी राजस्व हिस्सा मिलता है। इसका आकलन कंपनियों के पास उपलब्ध स्पेक्ट्रम के आधार पर होता है। साथ ही संचार सेवाओं की बिक्री से प्राप्त आय में लाइसेंस शुल्क के रूप में आठ फीसदी हिस्सा मिलता है।

सरकार ने पूर्वोत्तर क्षेत्रीय विद्युत व्यवस्था सुधार परियोजना के लिए 6,700 करोड़ की संशोधित अनुमानित लागत को मंजूरी दी है। परियोजना का उद्देश्य उस क्षेत्र के छह राज्यों असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड और त्रिपुरा में अंतरराज्यीय ट्रांसमिशन एवं वितरण व्यवस्था को मजबूत बनाना है। एक बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) ने पूर्वोत्तर क्षेत्रीय विद्युत व्यवस्था सुधार परियोजना (एनईआरपीएसआईपी) के लिए लागत के संशोधित अनुमान (आरसीई) को मंजूरी दे दी। यह योजना बिजली मंत्रालय के तहत आने वाले पावर ग्रिड के जरिए इन राज्यों के सहयोग से लागू होगी।

योजना शुरू होने के बाद संबंधित राज्यों की बिजली वितरण कंपनियां इसकी जिम्मेदारी संभालेंगी। परियोजना को बिजली मंत्रालय की केंद्रीय क्षेत्र योजना के तहत पहली बार दिसंबर, 2014 में मंजूरी मिली थी। इसके लिए सरकार और विश्व बैंक ने 50-50 फीसदी के अनुपात में योगदान दिया है। लेकिन इसमें क्षमता निर्माण पर होने वाले 89 करोड़ का खर्च केंद्र देगा।

सरकार ने देश में इलेक्ट्रॉनिक चिप प्लांट लगाने और विदेश में सेमीकंडक्टर बनाने वाली कंपनियों के अधिग्रहण के लिए प्रस्ताव मांगे हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) ने इस संबंध में मंगलवार को रुचि पत्र जारी किया। इसके मुताबिक, सरकार भारत में सेमीकंडक्टर बनाने वाली इकाइयों की स्थापना में निवेश को प्रोत्साहित करना चाहती है।

इसलिए मंत्रालय भारत में सेमीकंडक्टर उपकरणों के विनिर्माण प्लांट की स्थापना/मौजूदा प्लांट के विस्तार या भारत से बाहर सेमीकंडक्टर बनाने वाली कंपनियों के अधिग्रहण के लिए इच्छुक कंपनियों/कंसोर्टियम से रुचि (ईओआई) आमंत्रित करता है। प्रस्ताव जमा करने की अंतिम तिथि 31 जनवरी, 2021 है।