लॉकडाउन के दौरान बीमार नाइट गार्ड की नागालैंड के दीमापुर में मौत हो गई, शव लाने में असमर्थ पुत्रों ने पहले पिता को ऑनलाइन मुखाग्नि दी बाद में मंझौल के गंडक नदी के किनारे पिता का पुतला बनाकर उसका दाह संस्कार किया। दरअसल मंझौल के कमला मोहल्ला का 70 वर्षीय चंद्रदेव राम नागालैंड के दीमापुर में लकवाग्रस्त हो गया।


चंद्रदेव राम के पुत्रों ने अपने बीमार पिता को लाने की मंझौल एसडीओ से अनुमति मांगी। नियमों का हवाला देते हुए एसडीओ ने कहा कि जाने की अनुमति का पत्र तो मिल सकता है, लेकिन वहां से बीमार को लाने की व्यवस्था खुद करनी होगी।


इधर अकेला चंद्रदेव राम रोग से नहीं लड़ सका और मंगलवार को उसकी मौत हो गई। इधर चंद्रदेव को जिंदा लाने की अनुमति तो नहीं मिली लेकिन उसके मरने के बाद दीमापुर प्रशासन द्वारा संपर्क करने के बाद मृतक के पुत्र राजकुमार ने वहां के प्रशासन की पहल पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपने पिता का अंतिम संस्कार किया, जिसके बाद मंझौल में भी पिता का पुतला बनाकर गंडक नदी के किनारे परंपरा के अनुसार उनका दाह संस्कार किया।


इस संबंध में राजकुमार ने जब अपने पिता को लाने की अनुमति से संबंधित आवेदन मंझौल एसडीओ को दिया तो एसडीओ ने कहा कि यहां से जाने की अनुमति तो मैं दे सकता हूं लेकिन वहां से लाने में किस प्रकार की दिक्कतें होगी यह आपको खुद समझना होगा।