देश में कोरोना के मामलों में तेज़ी से बढ़ोतरी हो रही है। देश में आज कोरोना संक्रमण का आंकड़ा 3 लाख 32 हज़ार को पार कर गया। देश और राज्य इस वक्त गंभीर संकट से जूझ रहे है लेकिन इस बीच नागालैंड से एक बड़ी ख़बर सामने आई है। नागालैंड के 1800 एनएचएम कार्यकर्ता रविवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए है। प्रदेश में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के 1,800 से अधिक कर्मचारियों ने अपनी सेवा नियमित किए जाने और स्वास्थ्यकर्मियों के समान वेतन की मांग को लेकर रविवार से ‘काम रोको’ विरोध शुरू कर दिया।


बता दें, एनएचएम कर्मचारियों में एम्बुलेंस चालक, प्रयोगशाला तकनीशियन, नर्सें, दंत, आयुष और एलोपैथिक डॉक्टर शामिल हैं। एनएचएम कर्मचारी संघ के अध्यक्ष डॉ. शासिनलो माघ ने कहा कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की ओर से राज्य में तैनात 1,850 कर्मचारियों ने तीन सूत्रीय मांगें पूरी नहीं होने तक रविवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का फैसला लिया है। उनकी मांग है कि एनएचएम कर्मचारियों को नियमित किया जाए, राज्य स्वास्थ्यकर्मियों के समान पद के लिए समान वेतन दिया जाए और सभी बुनियादी सुविधाएं मुहैया करायी जाएं।


NHM  कार्यकर्ताओं ने ये हड़ताल तब शुरू कि जब राज्य पहले से कोरोना की चपेट में है। रविवार को ही राज्य में पांच और लोग कोरोना वायरस संक्रमण से पॉजिटिव पाए गए थे, जिसके साथ राज्य में कुल मामलों की संख्या 168 हो गई। समाचार के मुताबिक स्वास्थ्य विभाग के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि एनईएएन के नेताओं को चर्चा के लिए बुलाया गया है और मामले को सुलझा लिया जाएगा।


यह पूछे जाने पर कि एनएचएम कर्मचारियों की अनुपस्थिति में विभाग वर्तमान कोविड-19 स्थिति का प्रबंधन कैसे कर रहा है, अधिकारी ने कहा, ‘यह मुश्किल है लेकिन एनएचएम के कर्मचारी जहां भी लगे हैं, जिला टास्क फोर्स द्वारा कुछ तात्कालिक व्यवस्था की जा रही है।’ दरअल कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई के दौरान स्वास्थ्य कर्मचारियों की कमी को पूरा करने के लिए 11 जून को राज्य मंत्रिमंडल ने 11 जिला अस्पतालों के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों के 53 पदों और उन सुविधाओं के लिए स्टाफ नर्स के 143 पदों के नियुक्ती को मंजूरी दी थी।


इसी से नाराज़ होकर ये फैसला लिया गया है। एनईएएन के अध्यक्ष डॉ. शासिनलो माघ ने कहा, ‘हम कोविड -19 महामारी के समय यह कदम नहीं उठाना चाहते थे, लेकिन राज्य मंत्रिमंडल के 11 जून के फैसले में अनुबंधित कर्मचारियों की सेवाओं को नियमित करने पर विचार नहीं किया गया इसलिए यह कदम उठाना पड़ा।’ माघ ने कहा कि एनएचएम कर्मचारी 2005-06 में राज्य में मिशन की स्थापना के बाद से सेवाएं दे रहे थे। उन्होंने कहा, ‘जब तक हमारी तीन सूत्रीय मांगें पूरी नहीं होती, हम आंदोलन करेंगे।’