मिजोरम-असम सीमा पर ग्राम परिषदों और संगठनों के एक समूह ने मंगलवार को दोनों राज्य सरकारों से मूल दावों से पीछे हटकर दोनों को स्वीकार्य बिंदु पर सीमा निर्धारण से विवाद सुलझाने का आग्रह किया। स्थानीय गैर सरकारी संगठनों के अलावा वैरेंगटे और पड़ोसी सीमावर्ती गांवों जैसे फेनुम और सैपुम के ग्राम परिषदों के नेताओं ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि वे आपसी समझ के पक्षधर हैं।

उन्होंने जोर देकर कहा कि 80 से 150 साल पहले जारी अधिसूचनाओं के आधार पर विवाद को सुलझाने का प्रयास अब संभव नहीं है। टीम का नेतृत्व करने वाले वैरेंगटे संयुक्त ग्राम परिषद के अध्यक्ष आर. लालफमकिमा ने कहा कि जब तक दोनों पक्षों के लोगों द्वारा मूल रूप से या स्थायी रूप से कब्जा किए गए क्षेत्रों के संबंध में आपसी समझ नहीं बनती, तब तक कोई स्थायी समाधान नहीं हो सकता।

इससे पहले 26 जुलाई के गतिरोध के दो दिन बाद नई दिल्ली में गृह मंत्रालय द्वारा बुलाई गई बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि अशांत असम-मिजोरम सीमा पर एक तटस्थ केंद्रीय बल तैनात किया जाएगा। केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला की अध्यक्षता में हुई बैठक में दोनों राज्यों के मुख्य सचिव और डीजीपी शामिल हुए थे। हालांकि, राज्य पुलिस बलों ने सीमा पर पहरा देना जारी रखा है। वहीं, असम और मिजोरम के प्रतिनिधियों ने 5 अगस्त को आइजोल में बातचीत की और अंतर-राज्यीय सीमा विवाद को सौहार्दपूर्ण ढंग से हल करने पर सहमत हुए थे। 

बैठक के बाद जारी एक संयुक्त बयान में कहा गया है, ‘‘असम और मिजोरम की सरकारों के प्रतिनिधि असम और मिजोरम में रहने वाले, विशेष तौर पर सीमांत क्षेत्रों के लोगों के बीच शांति और सद्भाव को बढ़ावा देने, संरक्षित करने और बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक उपाय करने के लिए सहमत हैं।’’