देश में पहली बार हुए हैपीनेस सर्वे में सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को शामिल करते हुए रैंकिंग दी गई। मिज़ोरम, पंजाब और अंडमान व निकोबार टॉप 3 राज्य रहे, जहां लोग सबसे ज़्यादा खुश हैं। छत्तीसगढ़, ओडिशा और उत्तराखंड ने सबसे कम स्कोर किया। सर्वे की खास बात रही कि इसमें खुशी पर कोविड के प्रभाव को समझा गया इसलिए महाराष्ट्र, दिल्ली और हरियाणा जैसे राज्यों में खुशी कम देखी गई। जम्मू व कश्मीर कम खुश राज्यों में दिखा। इस सर्वे में क्या जानने लायक रहा और मिज़ोरम सबसे खुश राज्य कैसे बना?

हैपीनेस सर्वे में पांच कसौटियां रखी गई थीं : कामकाज, रिश्ते, स्वास्थ्य, सामाजिक सेवा, धार्मिक-आध्यात्मिक पक्ष। स्वास्थ्य में ही कोविड का प्रभाव भी शामिल था। इस सर्वे में देश भर के 16,950 लोगों से मार्च से जुलाई महीनों के बीच राय ली गई। प्रोफेसर राजेश पिलानिया ने इस स्टडी को जारी किया, जिसमें भारत के जाने माने लोगों ने खुशी और सामाजिक सरोकारों के बारे में अपनी राय रखी और इस अध्ययन को एक गंभीरता दी।

इस स्टडी के मुताबिक जेंडर और खुशी का आपस में कोई खास संबंध नहीं दिखा, जबकि वैवाहिक जीवन, आयु, शिक्षा और आय का खुशी के साथ गहरा संबंध दिखा। ये भी दिखा कि देश में विवाहित लोग गैर शादीशुदा लोगों के मुकाबले ज़्यादा खुश हैं। कामकाज से जुड़े मामलों में असम, मिजोरम, अंडमान, पंजाब व पुडुचेरी तो संबंधों के मामले में पंजाब, कर्नाटक, मिजोरम, अंडमान और सिक्किम टॉप 5 राज्य रहे।

मिजोरम ने इस लिस्ट में बाज़ी मार ली, इसमें हैरत की बात इसलिए नहीं है क्योंकि यह देश के सबसे सुरक्षित राज्यों में से एक है। शांति और अछूती खूबसूरती के लिए मशहूर इस राज्य की अर्थव्यवस्था एक तरफ पर्यटन के हाथ में है तो दूसरी तरफ यहां के बाज़ार ज़्यादातर महिलाओं द्वारा संचालित हैं। यहां अपराध न के बराबर हैं जबकि लोग आत्मनिर्भर ज़्यादा हैं। यहां के लोग पिछले कुछ दशकों से हिंदी बोलने में दिलचस्पी लेते हैं और पर्यटकों की मानें तो यहां के लोग बेहद आत्मीय और अच्छे मेज़बान हैं।

मिज़ोरम की तरह ही उत्तर पूर्व के सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्य भी टॉप टेन लिस्ट में हैं। छोटे राज्य सर्वे में ज़्यादा खुश देखे गए। हार्वर्ड बिज़नेस स्कूल के एपी डॉ. एशले विलियम्स के मुताबिक जिन राज्यों में लोग पैसों से ज़्यादा अहमियत समय को देते हैं, वो ज़्यादा खुश पाए गए। दूसरी तरफ, स्टेनफोर्ड की डॉ.। ईमा सेपला के मुताबिक जिन राज्यों में लोग दयालु, सहिष्णु और धैर्यवान हैं, वहां खुशी और समृद्धि ज़्यादा है।

इस सर्वे की एक और खास बात यह है कि अध्ययन और विश्लेषण के मुताबिक इसमें साल 2025 की हैपीनेस इंडेक्स भी जारी की गई है। एक अनुमान के मुताबिक कहा गया है कि स्वास्थ्य और सामाजिकता और​ विकास के हिसाब से स्थितियां बदलेंगी इसलिए अगले पांच सालों में मणिपुर, अंडमान, गुजरात, लक्षद्वीप, उत्तराखंड, आंध्र प्रदेश, सिक्किम, पंजाब, राजस्थान और कर्नाटक सबसे खुश 10 राज्यों में शामिल होंगे।

गौरतलब है कि भूटान पहला देश है, जिसने जीडीपी के बजाय जीएनएच यानी ग्रॉस नेशनल हैपीनेस को ज़्यादा अहमियत दी थी। भूटान ही हर साल अपने देश का हैपीनेस इंडेक्स जारी करता रहा। इसकी तर्ज़ पर दुनिया में हैपीनेस रिपोर्ट सालाना तैयार करने की शुरूआत हुई और भूटान हमेशा सबसे खुश देशों में शुमार होता रहा। 156 देशों की हैपीनेस रिपोर्ट 2020 में भारत 140वें नंबर पर रहा था, यानी सबसे कम खुश देशों में शुमार।