मिजोरम की राजधानी आइजोल के पास बख्तवांग गांव में रहने वाले दुनिया के सबसे बड़े परिवार के मुखिया जियोना चाना का आज निधन हो गया। 76 वर्षीय जियोना चाना के निधन की जानकारी मिजोरम के मुख्यमंत्री जोरामथंगा ने ट्वीट कर के दी। मुख्यमंत्री जोरामथंगा ने कहा कि मिजोरम का बख्तवांग गांव जियोना चाना के बड़े परिवार के वजह से पर्यटकों के बीच आकर्षण का केंद्र बन चुका है। महंगाई के इस दौर में जहां चार-पांच सदस्यों वाले परिवार का पालन पोषण करना एक बड़ी चुनौती हो सकती है, वहीं जियोना चाना 38 पत्नियां, 89 बच्चे, 14 बहुओं और 33 पोते पोतियों के साथ बख्तवांग गांव में एक 100 कमरों वाले बड़े घर में रहते थे।

 

जियोना चाना पेशे से बढ़ई थे। वहीं इस बड़े परिवार की महिलाएं खेती-बाड़ी करती हैं और घर चलाने में योगदान देती हैं। चाना की सबसे बड़ी पत्नी घर के सभी सदस्यों के कार्यों का बंटवारा करने के साथ ही कामकाज पर भी नजर रखती हैं। एक आम परिवार में जितना राशन दो महीने चलता है, इस परिवार की भूख मिटाने के लिए हर दिन उतना राशन खर्च हो जाता है। यहां एक दिन में 45 किलो से ज्यादा चावल, 30-40 मुर्गे, 25 किलो दाल, दर्जनों अंडे, 60 किलो सब्जियों की जरूरत होती है। इसके अलावा इस परिवार में लगभग 20 किलो फल की भी हर रोज खपत होती है।

दुनिया के सबसे बड़े परिवार के सदस्यों के नाम, उनके जन्मदिन और उनके अन्य क्रियाकलाप पर नजर रखना कितना मुश्किल होता है। इस बारे में चाना के सबसे बड़े पुत्र नुनपरलियाना कहते हैं कि परिवार में सब सदस्यों के नाम याद रखना मुश्किल नहीं है। लोग अपने ढेरों दोस्तों के नाम भी तो याद रखते हैं, हम उसी तरह अपने भाई-बहनों और अपने तथा उनके बच्चों के नाम याद रखते हैं। हां, जन्मदिन याद रखने में दिक्कत होती है, लेकिन किसी न किसी को याद रह ही जाता है। इलाके की सियासत में भी इस परिवार का खासा दबदबा है। एक साथ एक ही परिवार में इतने सारे वोट होने की वजह से तमाम नेता और इलाके की राजनीतिक पार्टियां इस परिवार पर अच्छा खासा महत्व देती हैं, क्योंकि स्थानीय चुनाव में इस परिवार का झुकाव जिस पार्टी की तरफ होता है, उसे ढेरों वोट मिलना पक्का है।