मिजोरम में मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) और सत्तारूढ़ मिजो नेशनल फ्रंट (MNF) ने इन आरोपों से इनकार किया है कि मुख्यमंत्री जोरमथांगा (Zoramthanga) और मिजोरम सरकार की सिलचर स्थित एक व्यापारी के साथ सांठगांठ थी, जो हाल ही में अपने कथित आरोप के लिए पुलिस के रडार पर आया था।


असम के एक ऑनलाइन पोर्टल (online portal) की रिपोर्ट के बाद स्पष्टीकरण आया कि असम के कछार जिले के सिलचर के इटखोला के निवासी अबू मजूमदार के घर पर छापा मारा गया था, जिसे हाल ही में नई दिल्ली में जोरमथांगा और उनके असम समकक्ष हिमंता बिस्वा सरमा (Himanta Biswa) के बीच एक रात्रिभोज में देखा गया था। बर्मी सुपारी की तस्करी के सिलसिले में असम पुलिस ने छापा मारा था।

यह रात्रिभोज सद्भावना के तौर पर पिछले साल नवंबर में सीमा वार्ता से इतर आयोजित किया गया था। रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया कि मजूमदार को जोरमथांगा (Zoramthanga) ने रात्रिभोज में आमंत्रित किया था क्योंकि वह मिजोरम सरकार के करीबी सहयोगी थे।

ऑनलाइन न्यूज पोर्टल की रिपोर्ट में कहा गया है कि "सूत्रों की माने तो अबू मजूमदार एक शीर्ष स्तर का हैंडलर है और मिजोरम सरकार के साथ उसके करीबी संबंध हैं।" CMO और MNF ने आरोप को 'निराधार' बताते हुए सोमवार को अलग-अलग बयानों में कहा कि मुख्यमंत्री जोरमथंगा ने मजूमदार को रात के खाने पर आमंत्रित नहीं किया। CMO ने कहा कि रात्रिभोज का आयोजन असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने पिछले साल 25 नवंबर को नई दिल्ली में असम हाउस में किया था।

CMO ने बयान में कहा कि “मुख्यमंत्री के साथ आए लोगों के अलावा किसी अन्य अधिकारी ने रात के खाने में हिस्सा नहीं लिया, जिसकी मेजबानी असम के मुख्यमंत्री ने की थी। मजूमदार को असम के मुख्यमंत्री ने आमंत्रित किया होगा, ”। MNF ने यह भी कहा कि कथित सुपारी तस्कर मजूमदार के साथ मिजोरम के मुख्यमंत्री के साथ जाने का आरोप पूरी तरह गलत था।