मिजोरम सरकार ने राज्य में शरण लिए हुए म्यांमार के नागरिकों के लिए एक आदेश जारी किया है। जिसमें कहा गया है कि म्यांमार के शरणार्थी राज्य सरकार की अनुमित के बिना न जमीन खरीद पाएंगे और न किसी भी तरह व्यवसाय चला पाएंगे साथ ही आदेश में कहा गया है कि शरणार्थी अवैध व्यवसाय भी न करें।

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सरकार के आदेश में कहा गया है कि शरणार्थी अपने वाहनों के बारे में संबंधित स्थानीय या ग्राम स्तरीय समिति को सूचित करें। म्यांमार के शरणार्थी अपने देश से वाहनों को लाए हैं। आदेश में कहा गया है कि शरण लिए लोग आधार, राज्य मतदाता सूची या ड्राइविंग लाइसेंस के लिए भी नामांकन नहीं कर सकते।सरकार ने सभी स्थानीय और ग्राम स्तर की समितियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि आदेश का सख्ती से पालन किया जाए और आदेश के उल्लंघन के मामले में म्यांमार शरणार्थियों पर जिला कार्य समूह के अध्यक्ष को रिपोर्ट करें। गृहमंत्री लालचमलियाना ने हाल ही में राज्य विधानसभा को सूचित किया था कि पिछले साल फरवरी में सैन्य सत्ता पर कब्जा करने के बाद से म्यांमार के 30,401 नागरिकों ने अब तक मिजोरम में शरण ली है। मिजोरम म्यांमार के साथ 510 किलोमीटर लंबी झरझरा सीमा साझा करता है।

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मिजोरम में शरण लेने वाले म्यांमार के नागरिक ज्यादातर चिन समुदायों से हैं, जो मिजोरम के साथ जातीयता और वंश से जुड़े हुए हैं। अधिकांश शरणार्थी सरकार और गांव के अधिकारियों द्वारा स्थापित अस्थायी शिविरों में रह रहे हैं, जबकि कुछ ने किराए पर घर ले लिया है और कुछ अन्य अपने स्थानीय रिश्तेदारों के साथ रहते हैं। अधिकारियों के मुताबिक, राज्य के विभिन्न हिस्सों में करीब 156 राहत शिविर बनाए गए हैं। म्यांमार के नागरिकों को राज्य सरकार, गैर सरकारी संगठनों, चर्चों और गांव के अधिकारियों द्वारा भोजन और अन्य राहत प्रदान की जाती है। अधिकारियों ने बताया कि राज्य सरकार ने अब तक म्यांमार के नागरिकों को 380 लाख रुपये की राहत राशि मुहैया कराई है।