आइजोल। सेना का सत्ता पर कब्जा करने के बाद से विभिन्न चरणों में मिजोरम में शरण लेने वाले 30,401 म्यांमार नागरिकों का एक छोटा वर्ग अब राज्य में जमीन खरीदने और छोटे व्यवसाय करने या जबरन दुकानें खोलने की कोशिश कर रहा है। राज्य सरकार ने प्रवासियों को ऐसा करने से रोकने के लिए सख्त आदेश जारी किया। बता दें कि पिछले साल फरवरी में म्यांमार में सत्ता पलट कर दिया गया था।

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मिजोरम के पुलिस अधिकारियों ने कहा कि शरणार्थियों के आगमन की शुरूआत के बाद, म्यांमार से विभिन्न और अत्यधिक नशे की लत वाली दवाओं, हथियारों और गोला-बारूद, विदेशी जानवरों, सूखे सुपारी, विदेशी सिगरेट, विभिन्न तंबाकू उत्पादों और कई अन्य प्रतिबंधित पदार्थों की तस्करी में वृद्धि हुई है। पुलिस और अर्धसैनिक अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि म्यांमार और भारत के दोनों नागरिक अवैध व्यापार में शामिल हैं।

21 सितंबर को इस ऐसा ही एक तस्करी का मामला सामने आया था। जहां, असम राइफल्स के जवानों ने भारी मात्रा में म्यांमार जाने वाले हथियार, युद्ध जैसे सामान, एयर गन, एयर गन पेलेट, लड़ाकू वर्दी, रेडियो सेट, सामरिक बनियान, सामरिक दस्ताने और जूते मिजोरम के सियाहा जिले से जब्त किए। साथ ही पांच म्यांमार नागरिकों समेत सात लोगों को गिरफ्तार किया। मिजोरम में म्यांमार से जुड़ी तस्करी गतिविधियों में खतरनाक वृद्धि ने यंग मिजो एसोसिएशन (सीवाईएमए) की केंद्रीय समिति को हाल ही में मादक पदार्थों के बढ़ते अवैध व्यापार से निपटने के लिए केंद्रीय एंटी-ड्रग स्क्वॉड (सीएडीएस) बनाने के लिए प्रेरित किया।

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मिजोरम सरकार ने म्यांमार के शरणार्थियों को, जो वर्तमान में राज्य के सभी 11 जिलों में शरण ले रहे हैं, राज्य सरकार की पूर्व अनुमति के बिना जमीन, घर और व्यवसाय नहीं खरीदने का निर्देश दिया है। सरकार का यह आदेश कई रिपोट के बाद आया है कि, म्यांमार के प्रवासी म्यांमार सीमा से लगे जिलों में जमीन खरीदने, छोटी दुकानें खोलने और छोटे व्यवसाय चलाने की कोशिश कर रहे हैं। राज्य सरकार के आदेश ने शरणार्थियों को आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस या किसी अन्य सरकारी दस्तावेज के लिए नामांकन के किसी भी प्रयास से रोक दिया।

मिजोरम सरकार ने शरणार्थियों को पहचान के उद्देश्य से अस्थायी पहचान पत्र प्रदान किए हैं ताकि धारक को भारतीय नागरिकों से अलग किया जा सके। हालांकि ये मिजोरम के बाहर मान्य नहीं है। आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, सभी 11 जिलों में 156 से अधिक शिविरों में 11,798 बच्चों और 10,047 महिलाओं सहित लगभग 30,400 म्यांमार शरणार्थियों में से अधिकांश ने मिजोरम में शरण ली है, जबकि उनमें से बड़ी संख्या ने रिश्तेदारों के घरों, समुदाय, केंद्रों, किराए के घरों, सरकारी भवनों और आश्रय गृह में शरण ली, जो कि सीवाईएमए, पूर्वोत्तर भारत के सबसे बड़े गैर सरकारी संगठनों में से एक समेत विभिन्न गैर सरकारी संगठनों द्वारा स्थापित किए गए थे।