मिजोरम सरकार के राज्य के गृह मंत्री ने बताया कि वर्तमान में सरकार म्यांमार के नागरिकों की जनगणना कर रही है जिन्होंने पिछले साल फरवरी में सैन्य तख्तापलट के बाद अपने घरों से भागकर राज्य में शरण ली थी। 

राज्य के गृह मंत्री लालचमलियाना ने कहा कि जनगणना के माध्यम से हमारी सरकार म्यांमार के नागरिकों के दस्तावेज तैयार करेगी।  आपको बता दें कि व् वर्तमान में जिला प्रशासन द्वारा जनगणना की जा रही है.

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उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उन सभी म्यांमार नागरिकों को भी पहचान पत्र जारी करेगी, जिन्होंने अपने देश में मौजूदा राजनीतिक संकट के कारण मिजोरम में शरण ली थी।

लालचमलियाना के अनुसार, म्यांमार सेना और नागरिक रक्षा बलों के बीच हिंसक झड़पों के मद्देनजर पिछले एक सप्ताह में लगभग 2,000 और शरणार्थियों ने राज्य में प्रवेश किया है। उन्होंने ने पुलिस रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा कि लगभग 18,000 म्यांमार नागरिक वर्तमान में मिजोरम के विभिन्न हिस्सों में शरण ले रहे हैं।"

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उन्होंने कहा कि केंद्र उन्हें किसी भी प्रकार की सीधी सहायता प्रदान नहीं की। राज्य सरकार ने शरणार्थियों की मानवीय आधार पर सहायता करने के लिए 80 लाख रुपये  सहायता राशि जारी की है।  

आपको बता दें कि राज्य के छह जिले - चम्फाई, सियाहा, लवंगतलाई, सेरछिप, ह्नाहथियाल और सैतुअल- म्यांमार के चिन राज्य के साथ 510 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करते हैं। म्यांमार में तख्तापलट से पूर्वोत्तर राज्य शरणार्थियों की समस्या का सामना कर रहे है।  म्यांमार के नागरिक सभी ग्यारह जिलों में शरण ले रहे हैं, जिसमें सबसे ज्यादा 7,810 चम्फाई हैं।

सूत्रों ने बताया कि मिजोरम का सबसे दक्षिणी लावंगतलाई जिला 3,761 के साथ दूसरे स्थान पर है, जबकि कुल 1,916 म्यांमार के नागरिक वर्तमान में आइजोल जिले में शरण ले रहे हैं।

लुंगलेई जिले में 1,236, सियाहा जिले (1,103), हनहथियाल जिला (1,732), सेरछिप जिला (347), कोलासिब जिला (123), सैतुअल जिला (53), ख्वाजावल जिला (64) और ममित जिला (244) हैं। .

म्यांमार के नागरिकों को सामुदायिक हॉल, स्कूलों, गैर सरकारी संगठनों और ग्रामीणों द्वारा स्थापित राहत शिविरों में रखा गया है, जबकि कई को उनके स्थानीय रिश्तेदारों ने भी ठहराया है।