मिजोरम में आइजोल के निकट पुलिस ने 100 करोड़ रुपये मूल्य की नशीली गोलियां (मेथ की गोलियां) जब्त कर असम के दो लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया। पुलिस ने शुक्रवार को कहा कि असम के करीमगंज जिले के निवासी मंटू कुमार देब (45) और सुभाष दास (33) दोनों को बृहस्पतिवार शाम आइजोल से लगभग 20 किलोमीटर दूर साइरंग जिले से गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने कहा कि औचक जांच के दौरान उनके ट्रक को रोका गया, जिसमें से 50 किलोग्राम मेथ की गोलियां मिलीं।

उन्होंने कहा कि स्वापक औषधि एवं मन-प्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 के तहत मामला दर्ज किया गया है। मामले की जांच जारी है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि राज्‍य में बहुत आसानी और सस्ते में मिल जाने वाली ड्रग याबा या कहे पिंक ड्रग या कहे मेटामेफ्टामाइन की इन गुलाबी रंग की छोटी सी गोली ने मिज़ोरम के लोगों के खून में ज़हर घोल रखा है। ये नशीली गोली म्यांमार के रास्ते मिजोरम तक आती हैं और फिर यहां से भारत के बड़े शहरों तक पहुंचती है। उन्‍होंने बताया कि इस ड्रग कारोबार में मुनाफ़ा काफी ज्यादा है जो गोली म्यांमार में महज़ 10 रुपये में बिकती है वो मिज़ोरम में आकर 300 रुपये और दिल्ली, मुंबई जैसे अन्य महानगरों तक जाते-जाते 2000 रुपये से ज्यादा प्रति गोली में बिकती है।

असम रायफल के 23 सेक्टर कमांडर ब्रिगेडियर दिग्विजय सिंह का कहना है कि मिज़ोरम में ड्रग की लत के पीछे सबसे बड़ा करण है कि आसानी से ड्रग उपलब्ध हो जाना। उनका कहना है कि मिजोरम एक ड्राई स्टेट है। यानि राज्य में पूर्ण रूप से शराबबंदी लागू है, ऐसे में लोग इस गुलाबी नशे का इस्तेमाल ज्यादा कर रहे हैं। वहीं सूत्र बताते हैं कि स्मगलिंग के जरिए कई प्रतिबंधित वस्तुओं की सप्‍लाई हो रही है।

ऐसा नहीं है कि सिर्फ पिंक ड्रग ही स्मगलिंग से भारत में पहुंचती है। इसके अलावा हेरोइन, गोल्ड और अन्य प्रतिबंधित वस्तुओं की भी म्यांमार से भारत चोरी छिपे सप्‍लाई होती है। कोरोना के चलते म्यांमार और भारत के बीच मौजूदा करारा फ़्री बॉर्डर मूवमेंट रिजीम को सस्पेंड कर दिया गया है, लेकिन इस अवैध कारोबार पर कोई असर नहीं पड़ा है।

असम रायफल ने पिछले साल कोरोना के दौरान भी क़रीब 35 करोड़ से ज्यादा की ड्रग पकड़ी थी और 40 लोगों को गिरफ़्तार किया था। इससे पहले 2019 में तकरीबन 50 करोड़ से ज्यादा की ड्रग पकड़ी गई थी और इस साल अब तक 16 करोड़ रुपये की ड्रग पकड़ी जा चुकी है। खास बात तो ये है कि इस पिंक ड्रग को बड़ी आसानी से स्मगल की जाती है जितनी भी खेप अब तक पकड़ी गई है वो छोटे-छोटे पैकेट में पकड़ी गई है और हर पैकेट में 20 हज़ार गोलियां पैक की जाती हैं।

चूंकि मिज़ोरम एक लैंड लॉक स्टेट है जो की दो तरफ से बंगलादेश और म्यांमार से घिरा है ऐसे में कहा जाता है कि पुराने समय में व्यापार भारत के मिज़ोरम से लाओस, म्यांमार और थाईलैंड हुआ करता था जिसे ओल्ड सिल्क रूट भी कहा जाता है और नमक के लिए मिज़ोरम इसी रूट की इस्तेमाल किया जाता था। इसे बाद में सॉल्ट रूट का भी नाम दिया गया था और इसी रूट का इस्तेमाल कर ड्रग भारत में तस्करी हो रही है।