मिज़ोरम सरकार ने त्रिपुरा-मिज़ोरम अंतरराज्यीय सीमा के एक छोटे से गाँव फूलदुंगसी में लोगों के आने जाने पर रोक लगा दी है। गांव में मंदिर और सामुदायिक गतिविधियों के निर्माण पर आपत्ति जताने के एक हफ्ते बाद यह फैसला लिया गया है। राज्य सरकार का कहना है कि धार्मिक गतिविधियों के कारण तनाव बढ़ सकता है और कानून व्यवस्था पर संकट खड़ा हो सकता है।

16 अक्टूबर से यह रोक लागू की गई है। चार लोगों के एक साथ इकट्ठा होने पर रोक लगा दी गई है। आदेश में कहा गया है कि अगर कोई भी नियमों का पालन नहीं करता तो उस पर भारतीय दंड संहिता की धारा 188 के तहत मुकदमा दर्ज किया जाएगा। जिसमें एक साल की सजा या 200 रुपये का जुर्माना है। अगर कानून व्यवस्था को खतरा होता है तो सजा छह महीने तक बढ़ाई जा सकती है।

इस संस्था के पास मिजोरम सरकार से अनुमति नहीं है। उन्होंने कहा कि मंदिर का निर्माण स्थानीय समुदाय के हित के विरुद्ध है। इससे तनाव बढ़ सकता है। इसलिए लोगों को एक साथ इकट्ठा होने पर रोक लगा दी गई है। 

फूलदुंगसी गांव मिजोरम और त्रिपुरा सरकार के बीच सीमा विवाद का कारण है। फिर भी यह गांव त्रिपुरा सरकार के नियमों के अधीन है। इस मामले पर त्रिपुरा की सरकार ने मिजोरम सरकार से बात की है। अगस्त में कंचनपुर एसडीएम चांदनी चंद्रन ने अपने उच्चाधिकारियों को इस बात की सूचना दी थी कि 130 गांव वाले जिनके पास त्रिपुरा का राशन कार्ड है उनका नाम मिजोरम की वोटर लिट्स में दर्ज है। मिजोरम के गृह सचिव लालबिक्सांगी ने शुक्रवार को त्रिपुरा के अपने समकक्ष अधिकारी को पत्र लिखकर मंदिर निर्माण रोकने को कहा।