देश के पूर्वोत्तर में स्थित मिजोरम में पढ़ाई के लिए बच्चों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी रही है। ऑनलाइन क्लास करने के लिए छात्रों को रोजाना तीन किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता हैं। मिजोरम के ममित जिले के पुकिंग वेंगथर गांव में इंटरनेट कनेक्टिविटी की कमी के चलते यहां रहने वाले छात्रों की पढ़ाई नहीं हो पाती है। ऐसे में छात्र पढ़ाई या परीक्षा देने के लिए गांव से तीन किलोमीटर दूर जाकर इस सुविधा का लाभ उठा पाते हैं। 

पुकिंग वेंगथर के ग्राम परिषद अध्यक्ष ने समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा, "इंटरनेट कनेक्टिविटी की कमी के कारण, छात्रों को गांव में सिग्नल नहीं मिल पाता है। ऐसे में बच्चों को गांव से तीन किलोमीटर दूर तलंगनुम गांव को पार कर कस्बे की ओर जाना पड़ता है। वहां जाकर नेट की कनेक्टिविटी मिल पाती है। ग्राम परिषद अध्यक्ष ने बताया कि बारिश के दौरान भी छात्रों को परीक्षा देने या असाइनमेंट जमा करने के लिए तीन किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। 

एएनआई से बातचीत करते हुए एक छात्र ने बताया कि सिग्नल पाने के लिए हर रोज तीन किमी से अधिक की दूरी तय करना पड़ती है। छात्र का कहना है कि ऑनलाइन परीक्षा देना वास्तव में कठिन है, क्योंकि गांव में इंटरनेट कनेक्टिविटी की सुविधा नहीं है। बता दें कि पुकिंग वेंगथर गांव उप-जिला मुख्यालय से सिर्फ 60 किमी और जिला मुख्यालय ममित से 104 किमी दूर पर स्थित है। गांव की आबादी 500 लोगों की है।

गौरतलब है कि इस महीने की शुरुआत में, दक्षिण मिजोरम के सियाहा जिले के एक दूरदराज के गांव के सात छात्रों ने खराब इंटरनेट कनेक्टिविटी के कारण पहाड़ पर बैठक कर स्नातक की ऑनलाइन सेमेस्टर परीक्षा दी। पहाड़ी की चोटी पर बांस, तिरपाल और केले के पत्तों से बनी एक अस्थायी झोपड़ी बनाई गई थी । उसी परीक्षा केंद्र में बैठकर छात्रों ने फाइनल ईयर की समेस्टर परीक्षा दी थी।