दक्षिण भारत के विश्व-प्रसिद्ध तिरुपति मंदिर से बालों की तस्करी की जा रही है। बड़ी तादाद में इन बालों को उत्तर-पूर्व के राज्यों से म्यांमार के रास्ते चीन ले जाया जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप अपने बाल दान करने वाले श्रृद्धालुओं के लिए यह मामला परेशान करने वाला है। 

तिरुपति मंदिर में खासतौर पर महिलाएं अपने केश दान करती हैं और यह भगवान के प्रति उनकी आस्था का प्रतीक है। यहां बड़ी मात्रा में बाल इकट्ठा हो जाते हैं। वहीं तिरुपति मंदिर से बालों की तस्करी का मामला नया नहीं हैं। कई सालों से यह काम किया जा रहा है। ताजा मामले के अनुसार हाल ही में असम राइफल्स ने म्यांमार बॉर्डर के करीब मिजोरम में 1.80 करोड़ रुपए के बालों की एक बड़ी खेप पकड़ी थी। 

सूत्रों ने बताया कि तिरुपति मंदिर से गैर-कानूनी तरीके से बालों को चीन भेजा रहा है। चीन में इन बालों से विग बनाए जाते हैं। इन विग्स को दक्षिण-पूर्वी देशों में सप्लाई किया जाता है। बालों के इस व्यापार में चीन खूब चांदी कूट रहा है। पिछले महीने में असम राइफल्स ने कस्टम डिपार्टमेंट की मदद से मिजोरम के चम्पाई जिले से दो ट्रक भरकर बाल पकड़े थे। इन दोनों ट्रकों में करीब 120 बोरियां थी जिनमें बाल थे। जांच में पता चला कि बालों की ये खेप आंध्र प्रदेश के तिरुपति से मिजोरम पहुंचनी थे। मिजोरम से इन बालों को स्मगलिंग करके चीन भेजा जाना था। असम राइफल्स ने इस छापेमारी में एक तस्कर‌ को भी गिरफ्तार किया था।

दरअसल, म्यांमार से बड़ी तादाद में नारकोटिक्स ड्रग्स की स्मगलिंग भी मिजोरम और मणिपुर के रास्ते भारत में होती है। म्यांमार में जो मेटाफिन की एक टेबलेट मात्र 8-10 रुपए में मिलती है, वो मिजोरम में 80-90 रुपए मिलती है। लेकिन जब यही टेबलेट मुंबई और दिल्ली जैसे मैट्रोपोलटिन शहरों में पहुंचती है तो उसकी कीमत 2-3 हजार पहुंच जाती है। उत्तर-पूर्व में मिजोरम उन राज्यों में से है जो ड्रग्स की लत से जूझ रहा है। असम राइफल्स भी स्थानीय युवकों को ड्रग्स की लत छुड़ाने के लिए एनजीओ की मदद से कई कार्यक्रम करती है।