यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी (UDP) के अध्यक्ष मेटबाह लिंगदोह (Metbah Lyngdoh) ने केंद्र सरकार से सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम, 1958 (AFSPA) को निरस्त करने की मांग की, जो सशस्त्र बलों को "अशांत क्षेत्रों" में सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए विशेष अधिकार प्रदान करता है।
मेटबाह लिंगदोह (Metbah Lyngdoh) ने कहा कि "AFSPA कोई समाधान नहीं है क्योंकि इसने पूर्वोत्तर में उग्रवाद के मुद्दे को हल नहीं किया है।" उन्होंने कहा कि नागालैंड के मोन जिले (Mon district) में नागरिकों की हालिया हत्या का सीधे तौर पर उग्रवाद से कोई लेना-देना नहीं है, इसलिए यह एक स्पष्ट संदेश है कि AFSPA ने इस क्षेत्र में उग्रवाद का समाधान नहीं किया है।
मेटबाह (Metbah Lyngdoh) के अनुसार, उग्रवाद (insurgency) को हल करने के तरीके हैं जिन्हें बातचीत के माध्यम से संबोधित किया जा सकता है न कि गोलियों से। राज्य पुलिस विभाग द्वारा किए गए मेघालय के उग्रवाद विरोधी अभियानों को याद करते हुए, UDP प्रमुख ने राज्य मशीनरी से आंतरिक संकट से निपटने का अवसर देने की अपील की है।
UDP अध्यक्ष ने कहा कि "हमें अपनी पुलिस पर भरोसा होना चाहिए, उनके पास कर्मी, ज्ञान, कौशल, भाषा और गतिशीलता है जो अधिक प्रभावशीलता को सक्षम करती है। उन्होंने दोहराया कि AFSPA को खत्म करने की जरूरत है।