मेघालय के पूर्वी जयंतिया पहाड़ियों जिले में विषाक्त 'नीली' नदी को बांग्लादेश के सिलहट जिले में गंभीर रूप से लुप्तप्राय मछली प्रजातियों के विलुप्त होने का मुख्य मामला माना जा रहा है। इंटरनेशनल यूनियन ऑफ कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) द्वारा संकलित बांग्लादेश की रेड लिस्ट में बताया गया है कि निवास स्थान के विनाश ने लुका नदी (बांग्लादेश में लुबाछरा) से मछली की प्रजातियों के विलुप्त हो रही है। मेघालय की लुका नदी और बांग्लादेश में सिलहट जिले के पूर्वोत्तर कोने में सुरमा नदी की एक सहायक नदी लुबाचारा नदी में गोलपारा पाश मछली यानी नेउसीरिरिचथिस माईडेली पाई जाती है।


इससे मछलियों की प्रजातियां खत्म हो रही है। लुका नदी बांग्लादेश में पूर्वी जयंतिया पहाड़ियों में सोनापुर से लगभग 8 किलोमीटर दूर बहती है, इसे बांग्लादेश में लुबाचारा के रूप में जाना जाता है। यह नदी सर्दियों के महीनों में गहरे नीले रंग में बदल जाती है क्योंकि मेघालय के पूर्वी जयंतिया पहाड़ियों जिले में थांगस्कई और लमशानोंग के आसपास चूना पत्थर की खदानों और सीमेंट कारखानों से होने वाले डिस्चार्ज होने के कारण यह गहरे नीले रंग में बदल जाती है। इस मुद्दे पर खासी स्टूडेंट्स यूनियन (KSU) ने लूखा को प्रदूषित करने के लिए सीमेंट कंपनियों को दोषी ठहराया है।


खासी स्टूडेंट्स यूनियन ने मेघालय सरकार से कहा कि जलीय वनस्पतियों और जीवों को लुखा के 'जहरीले' पानी के कारण नष्ट कर दिया गया है। इन्होंने दो सीमेंट कंपनियों टॉपसीम सीमेंट और स्टार सीमेंट पर नदी प्रणाली को प्रदूषित करने का आरोप लगाया है। जानकारी के लिए बता दें कि मेघालय के पूर्वी जयंतिया पहाड़ियों के जिले में, टॉपसीम सीमेंट और स्टार सीमेंट सीमेंट के सबसे बड़े उत्पादक हैं। केएसयू ने आरोप लगाया है कि लुका के 'विषैले' पानी से जीवों की कई लुप्तप्राय प्रजातियाँ हैं। जिसमें लुबाछारा नदी में गोलपारा पाश मछली को नहीं देखा गया है। गोलपारा पाश मछली नदी प्रणाली में एक अनोखी प्रजाति थी, और इसकी लंबाई लगभग 3.6 सेमी है।