पूर्वोत्तर राज्य मेघालय में कोरोना से जान गंवाने वाले डॉक्टर को आखिरकार 36 घंटे के बाद दफनाया गया। एक शवदाह गृह ने कोरोना वायरस से जान गंवाने वाले लोगों के शवों को दफनाने लिए पीपीई नहीं होने और स्थानीय लोगों के विरोध का हवाला देते हुए डॉक्टर का बुधवार को अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया था। ईस्ट खासी हिल्स डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट मत्स्यविदोर नोंगब्री ने बताया कि परिवार के सदस्य उन्हें री भोई जिले में अपनी निजी भूमि में दफनाना चाहते थे, लेकिन कुछ परेशानी थी, तब वे चाहते थे कि उनका अंतिम संस्कार किया जाए, लेकिन जनता इसके विरोध में आ गई।

एक रिपोर्ट के अनुसार इन सबके बीच डॉक्टर का शरीर 36 घंटे तक उस अस्पताल में पड़ा था, जिसकी स्थापना उन्होंने लगभग दो दशक पहले की थी। बता दें राज्य में बेथानी अस्पताल के संस्थापक जॉन एल सेलिओ रेनथियांग की बुधवार की सुबह मौत हो गई थी, जबकि उनकी पत्नी समेत उनके परिवार के छह सदस्य कोरोना वायरस से संक्रमित पाये गये हैं।

उधर, देश में कोरोना संक्रमण के 1007 नए मामले सामने आने से संक्रमितों की संख्या 13 हजार के पार पहुंच गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक कोविड-19 के मरीजों की संख्या बढकऱ 13,387 हो चुकी है, इनमें 11, 201 एक्टिव मामले हैं। अब तक 1749 मरीज इस संक्रमण से ठीक हो चुके हैं। वहीं 437 लोगों की मृत्यु हो चुकी है। इस संक्रमण पर काबू पाने के लिए सैंपल टेस्टिंग का आंकड़ा भी बढ़ रहा है। पहली बार एक दिन में तीस हजार टेस्टिंग हुई, हालांकि अभी भी यह नाकाफी है। वहीं मध्यप्रदेश के इंदौर शहर की हालात खराब बनी हुई है। बता दें कि गुरुवार रात तक वहां मरीजों का आंकड़ा 842 पहुंच गया। अब तक वहां 47 लोगों की मौत हो चुकी है। गुरुवार को वहां कोरोना से आठ मौतें हुई, जो बेकाबू होते हालात को बयान कर रहे हैं। बता दें कि मध्यप्रदेश में अब तक 64 मौतें कोरोना से हुई, जिनमें से अकेले इंदौर में 47 लोग काल का ग्रास बने।