मेघालय की राजधानी शिलॉन्ग में एक प्रभावी छात्र संगठन की ओर से जगह-जगह विवादित पोस्टर लगाने के बाद हड़कंप मच गया। मेघालय में रहने वाले सभी बंगालियों को 'बांग्लादेशी' बताने वाले पोस्टर्स को बाद में पुलिस ने हटवा दिया। साथ ही ट्वीट के जरिए पुलिस ने छात्र संगठन से अपील की कि वे कोई ऐसा काम न करें जिससे राज्य में शांति और सद्भाव को नुकसान पहुंचे। उन्होंने ऐसा किए जाने पर कार्रवाई की भी चेतावनी दी है।

जानकारी के मुताबिक, खासी छात्र संगठन की ओर से कथित तौर पर ऐसे पोस्टर्स कई जगहों पर लगाए गए थे, जिन पर 'मेघालय के सभी बंगाली बांग्लादेशी हैं' लिखा था। ऐसे कई पोस्टर्स सार्वजनिक स्थानों पर लगाए गए हैं। इसके अलावा छात्र संगठन की ओर से लगाए गए एक अन्य पोस्टर में लिखा है, 'बांग्लादेशियो, मेघालय, त्रिपुरा, असम और मिजोरम पर अत्याचार बंद करो।'

केएसयू के प्रमुख लम्बोक्सटर मार्नगर ने कहा कि इचमाती में बीते 28 फरवरी को हुई झड़प में केएसयू के एक सदस्य लुरशई हाइनेविता की मौत हो गई थी। हम पर अवैध प्रवासियों की ओर से तब हमला किया गया था, जब हम सीएए के खिलाफ प्रोटेस्ट से वापस लौट रहे थे। उन्होंने कहा कि हमने ये पोस्टर्स हाइनेविता को इंसाफ के लिए लगाए हैं। हालांकि, मेघालय पुलिस ने जगह-जगह लगे इन पोस्टर्स को हटा दिया है। साथ ही केएसयू को चेतावनी भी दी है कि वे राज्य में शांति और सद्भाव बिगाड़ने की कोशिश से बचें।

एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि सांप्रदायिक सौहार्द के लिए केएसयू को इस तरह की गतिविधियों में लिप्त होने से बचना चाहिए। प्रदेश की शांति व्यवस्था में खलल डालने वालों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं मेघालय के पूर्व राज्यपाल और बीजेपी नेता तथागत रॉय ने केएसयू पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के पूर्व राज्यपाल के रूप में पूरी जिम्मेदारी लेते हुए मैं यह कह रहा हूं कि केएसयू को एनएचएलसी की तरह बैन कर देना चाहिए।

रॉय ने कहा कि यह एक ऐंटी-नैशनल आतंकवादी संगठन है जो भारतीय नागरिकों को धमकाने का काम करता है। इसमें वे भारतीय नागरिक भी शामिल हैं, जो मेघालय में ब्रिटिश काल से ही रहते आ रहे हैं। गौरतलब है कि एनएचएलसी मेघालय में प्रतिबंधित एक उग्रवादी संगठन है।