मेघालय कैबिनेट (Meghalaya Cabinet) के शिलांग के थेम लेव मावलोंग क्षेत्र से सिख समुदाय को स्थानांतरित करने के फैसले के बाद, जिसे पंजाबी गली भी कहा जाता है, सिख बेदखली के विरोध में बैठ गए हैं। इस संबंध में मेघालय के उपमुख्यमंत्री प्रेस्टन तिनसोंग (Deputy Chief Minister Preston Tynsong) ने मीडिया से कहा कि सरकार इस मामले पर ''उचित परिश्रम'' के साथ काम कर रही है।

प्रेस से बात करते हुए उन्होंने कहा कि "हम उचित परिश्रम का पालन कर रहे हैं। यह सिख समुदाय को क्षेत्र से बाहर निकालने का सवाल नहीं है। हमारा उद्देश्य उन्हें उचित स्थान पर स्थानांतरित करना है।" 7 अक्टूबर को, मुख्यमंत्री कोनराड संगमा (CM Conrad Sangma) की अध्यक्षता में मेघालय मंत्रिमंडल (Meghalaya Cabinet) ने पंजाबी लेन से सिखों के स्थानांतरण का सुझाव देने वाले एक प्रस्ताव को मंजूरी दी थी।

प्रस्ताव की सिफारिश एक उच्च स्तरीय समिति ने की थी जिसकी अध्यक्षता स्वयं उपमुख्यमंत्री (Preston Tynsong) करते हैं। जून 2018 में समिति का गठन सिख समुदाय (Sikh community) और खासी समुदाय (Khasi community) के बीच सदियों पुराने भूमि विवाद का परिणाम था। दो समुदायों के बीच हुई हिंसक झड़प ने इस मुद्दे को और भी बल दिया। सिख समुदाय के अनुसार, भूमि उन्हें 1850 के दशक में हिमा माइलीम के सिएम (प्रमुख) द्वारा 'उपहार' के रूप में दी गई थी।