राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) ने केंद्र के नए कृषि कानूनों के विरोध में भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) से शनिवार को नाता तोड़ लिया। आरएलपी चीफ और नागौर से सांसद हनुमान बेनीवाल ने शाहजहांपुर में किसान रैली को संबोधित करते हुए यह घोषणा की। बेनीवाल ने केंद्र के तीनों कृषि कानूनों को किसानों के खिलाफ बताया है। आरएलपी पिछले तीन सालों में एनडीए का साथ छोड़ने वाला पांचवां दल बन गया है। इस साल सितंबर में कृषि कानूनों के विरोध में शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) भी एनडीए का साथ छोड़ चुका है।

साल 2019 के नवंबर महीने में महाराष्ट्र में भाजपा संग सरकार गठन के मतभेद पर शिवसेना एनडीए से अलग हो गई थी। लोकसभा के 18 सांसदों के साथ शिवसेना एनडीए में बड़े घटक दलों में एक थी। उस साल की शुरुआत में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) पर मतभेद के चलते असम गण परिषद एनडीए से अलग हो गया।

हालांकि लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी गठबंधन में फिर शामिल हो गई। इसी तरह साल 2018 में आंध्र प्रदेश के विशेष राज्य का दर्जा दिलाने की मांग के बीच तेलगु देशम पार्टी (TDP) भाजपा नीत गठबंधन से अलग हो गया। उसी साल राष्ट्रीय लोक समता पार्टी ने लोकसभा चुनाव से पहले सीट बंटवारे पर मतभेद के चलते एनडीए छोड़ दिया।

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में अभी भी 14 पार्टियां शामिल हैं। इसमें भाजपा के अलावा, तमिलनाडु की AIADMK, बिहार की जेडीयू, महाराष्ट्र की आरपीआई (ए), बिहार की एलजेपी, असम की असम गढ़ परिषद, यूपी का अपना दल, मेघालय की एनपीपी, तमिलनाडु की पीएमके, तमिलनाडु की ही टीएमसी, झारखंड की एजेएसयू, नागालैंड की एनडीपीपी, मिजोरम की एमएनएफ और सिक्किम का एसकेएम शामिल है।

उल्लेखनीय है कि हाल में एनडीए छोड़ने वाले हनुमान बेनीवाल ने शनिवार को अलवर के शाहजहांपुर में किसान रैली में कहा, ‘भारत सरकार द्वारा लाए गए कृषि विरोधी कानूनों के कारण आज आरएलपी राजग गठबंधन से अलग होने की घोषणा करती है।’ बेनीवाल ने कहा, ‘मैं राजग के साथ ”फेविकोल” से नहीं चिपका हुआ हूं। आज मैं खुद को राजग से अलग करता हूं।’