मेघालय के सेंग खासी फोरम ऑफ अन-एडेड स्कूल मेघालय ने राज्यसभा सदस्य प्रो. राकेश सिन्हा को एक ज्ञापन में राज्य सरकार द्वारा नियाम खासी की सूक्ष्म स्वदेशी आस्था संस्थान को वित्तीय सहायता प्रदान करने के कथित इनकार के बारे में बाद में अवगत कराया। कई मौकों पर संबंधित प्राधिकरण से संपर्क किया जा रहा है।
सेंग खासी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों के प्रतिनिधि ने सांसद को विभिन्न अनुदानों और योजनाओं से वंचित होने के बारे में भी सूचित किया था, विशेष रूप से एसएसए, आरएमएसए, तदर्थ, घाटा अनुदान के तहत सेंग खासी संस्थान को शामिल करने जैसी वित्तीय सहायता, हालांकि इनमें से कुछ संस्थान 15-20 से अधिक वर्षों से अस्तित्व में नहीं है।



यहां जारी एक बयान के अनुसार सिन्हा ने सेंग खासी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों के मुद्दों को राज्य सरकार और केंद्र सरकार के समक्ष उठाने का वादा किया है।


सेंग खासी जनजाति के लोग मेघालय में अल्पसंख्यक हैं और अपने रीति रिवाज के प्रति सजग रहते हैं । समुदाय की चौहद्दी लक्ष्मण रेखा की तरह है । इसलिए उनके द्वारा Seng Khasi Marbisu के शताब्दी वर्ष में मुख्य अतिथी के रूप में  आमंत्रित करना और सम्मान देना  इस बात को दर्शाता है भारत का हर व्यक्ति  संस्कृति और सरोकार से एक दूसरे से जुड़ा है।

इस छोड़ से लेकर उस छोड़ तक हम सब  एक हैं । भाषा  भूगोल को भावनायें पाट देती हैं । पहली बार किसी गैर जनजाती उसने भी  उत्तर भारत  के व्यक्ति को उन्होंने अपना सबसे बड़ा मंच दिया । वे ख़ासी बोलते हैं और संस्कृति के वाहक हैं । अत्यंत ही आकर्षक कार्यक्रम हुआ जिसमें 2400 बच्चों ने हिस्सा लिया ।