ULFA (I) एक बहुत ही खतरनाक और आतंकी संगठन हैं। उल्फा के डिप्टी कमांडर-इन-चीफ द्रष्टी राजखोवा ने मेघालय सेना के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। द्रष्टी राजखोवा के आत्मसमर्पण पर रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि उल्फा के उप-कमांडर-इन-चीफ द्रष्टि राजखोवा का 'आत्मसमर्पण' भारतीय सेना के 'तेज और सुनियोजित ऑपरेशन' का परिणाम है। रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी किया, जिसमें दावा किया गया कि आत्मसमर्पण मेघालय-असम-बांग्लादेश सीमा पर आर्मी इंटेलिजेंस एजेंसियों के एक ऑपरेशन का परिणाम है।


रक्षा मंत्रालय ने शीर्ष उल्फा (आई) के नेता द्रष्टि राजखोवा ने भारत सेना को आत्मसमर्पण कर दिया, की विज्ञप्ती जारी कर पूर्वोत्तर भारत में सभी को चौंका दिया है। वैसे जानकारी के लिए बता दें कि रक्षा मंत्रालय को स्थान गलत मिला क्योंकि दक्षिण गारो हिल्स जिले में बांग्लादेश की सीमा के साथ बोलबोगरे गांव है, और कहीं भी असम सीमा के पास नहीं है। इसके अलावा, रक्षा मंत्रालय की प्रेस विज्ञप्ति में उल्फा डिप्टी-लेटर-इन का नाम भी शामिल है रक्षा मंत्रालय ने बताया कि यह ऑपरेशन इनपुट पर आधारित था, जो पिछले नौ महीनों से लगातार जारी था।

मेघालय पुलिस के SF-10 कमांडो को आर्मी इंटेलिजेंस यूनिटों ने हटा दिया है, लेकिन यह दावा करना निश्चित रूप से गलत होगा कि उल्फा के डिप्टी कमांडर-इन-चीफ ने भारतीय सेना के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था। उल्फा कमांडर के आत्मसमर्पण को मजबूर करने के लिए, सफलता का श्रेय मेघालय पुलिस को जाना चाहिए। लेकिन रक्षा मंत्रालय ने आत्मसमर्पण का सारा श्रेय आर्मी इंटेलिजेंस को दे दिया। जिससे मेघालय पुलिस बेहद गुस्सा है। मेघालय पुलिस ने बताया कि मेघालय पुलिस के एसएफ कमांडो के साथ 30 मिनट की गोलीबारी के बाद उल्फा (आई) नेता ने चार अन्य कैडरों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया था।