मेघालय उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को हिरासत में हुई मौतों के अन्य सभी गैर-सूचीबद्ध मामलों पर एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है। मुख्य न्यायाधीश संजीव बनर्जी और न्यायमूर्ति एचएस थांगखियू की युगल पीठ ने यह आदेश दिया कि राज्य सरकार ने क्योंकि हिरासत में मौत के अन्य सभी मामलों का विवरण प्रस्तुत करने के लिए कुछ समय मांगा है, फिर चाहे वह जेल में हो या पुलिस हिरासत में, मौत का कारण बताते हुए एक विस्तृत हलफनामा, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच की कोई भी रिपोर्ट छह सप्ताह के भीतर दायर की जानी चाहिए। 

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अदालत ने कहा कि हालांकि 23 अगस्त, 2022 के पिछले आदेश के अनुसार राज्य सरकार द्वारा हिरासत में हुई मौतों के मामलों पर एक हलफनामा दायर किया गया था, लेकिन लोक अभियोजक द्वारा यह स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया गया था कि हिरासत में मौत के कुछ अन्य मामले भी हो सकते हैं। इस अवधि के दौरान भले ही घटनाएं सुधार गृहों या जेलों में न हुई हों। अदालत ने कहा कि सुधार गृहों में रहने वाले कैदियों में से एक की कोविड के कारण मरने का भी मामला है। राज्य स्पष्ट करेगा कि क्या कोविड के कारण मृत्यु के संबंध में देय सामान्य मुआवजा मृतक के परिजनों को दिया गया है। 

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अदालत ने आदेश में कहा कि राज्य के हलफनामे की प्रतियां वर्तमान कार्यवाही में प्रतिनिधित्व करने वाले सभी पक्षों को उपलब्ध कराई जानी चाहिए, जिनमें डॉ मोनिका, एमिकस क्यूरी भी शामिल हैं। अगले सात सप्ताह में मामला सामने आने से कम से कम एक सप्ताह पहले इस तरह की कवायद पूरी की जानी चाहिए। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 14 नवंबर को सूचीबद्ध की है।