हिमाचल से प्रभावित होकर मेघालय सरकार ने हर गांव की कहानी के तहत राज्य की सभी झीलों को विकसित किया हैं। यही नहीं इस परियोजना से प्रदेश में पर्यटन को भी खूब फायदा हुआ है। मेघालय सरकार ने न केवल सभी झीलों की स्थिति सुधारी, बल्कि जलक्रीड़ा के स्थलों के रूप में विकसित किया है। सभी झीलें संबंधित गांव के हवाले कर दी हैं। 

सरकार ने इस योजना को मनरेगा के साथ जोड़कर ग्रामीणों के लिए स्थायी रोजगार का साधन बनाया है। मेघालय सरकार ने हिमाचल सरकार की इस योजना के प्रत्येक पहलू को अपने यहां क्रियान्वित कर स्वरोजगार के साधन के तौर पर खड़ा कर दिया है।

मनरेगा के सहारे चल रही योजना में पर्यटकों को ग्रामीण खाना, लोक संस्कृति के साथ रहने की सुविधा उपलब्ध करवाई गई है। जिस तरह से राजस्थान में पर्यटन ग्रामीण परिवेश के साथ जुड़ने के कारण विकसित हुआ है। प्रदेश सरकार ने भी हर गांव की कहानी के जरिए प्राचीन विरासत को बाहर लाने का रास्ता अपनाया था।

हालांकि हिमाचल प्रदेश में यह  'हर गांव की कहानी' योजना सफल नहीं हुई थी और सरकार ने इसे बंद कर दिया था। यह योजना राजनीति का शिकार हुई और सरकार ने चार साल पहले योजना को बंद कर दिया था।। लेकिन उत्तर-पूर्वी राज्य मेघालय ने गांव की इस योजना का अनुसरण करते हुए सभी नदियों का ना सिर्फ उत्थान किया बल्कि पर्यटन को भी बढ़ाया है. 

इस योजना के तहत प्रदेश के सभी जिलों से एक कहानी चयनित की गई। ग्रामीण क्षेत्रों में हर स्थान की ऐसी घटनाएं जुड़ी हैं, जिन्हें पर्यटन की दृष्टि से जोड़ा जा सकता है। जिसके तहत पर्यटन विभाग ने हर गांव की कहानी का प्रचार किया और प्रारंभिक वित्तीय मदद की। 

मेघालय सरकार राज्य में इस योजना को शुरू करने जा रही है जिससे गांवों की संस्कृति को सीधे  पर्यटक जोड़ा जा सकें।