महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के तहत मेघालय में काम करने वाले मजदूरों की मजदूरी में सबसे ज्यादा बढ़ोत्तरी देखने को मिली है जो 2020-21 में 203 रुपये की जगह 23 रुपये और बढ़कर 226 रुपये हो गई है। जबकि केरल और लक्षद्वीप में कोई बढ़तरी नहीं हुई है। वहीं 15 मार्च को जारी अधिसूचना के मुताबिक राजस्थान में 1 रुपये की बढ़ोतरी देखी गई, जबकि छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में 3 रुपये की वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं मेघालय को छोड़कर बाकी सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने 2021-2022 के लिए घोषित मजदूरी कम रही जबकि 2020-21 में मजदूरी में ज्यादा बढ़ोत्तरी हुई थी। मेघालय में चुनाव के बाद तमिलनाडु और पुदुचेरी हैं, जिन्होंने 17 रुपये की बढ़ोतरी की है। 2020-21 में मजदूरी 256 रुपये से लेकर 273 रुपये यानी 9 रुपये बढ़ गई है।

ऐसा माना जा रहा है कि मजदूरी दरों में कम बढ़ोत्तरी ऐसे समय में हुई है जब ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना प्रवासी श्रमिकों के लिए एक सुरक्षा कवच के रूप में काम कर रही है, दरअसल ये उनके लिए है जो कोरोना वायरस की वजह से अपने गांवों में लौट आए हैं। वहीं 16 मार्च तक 7.42 करोड़ परिवार नौकरी की गारंटी योजना का लाभ उठा चुके हैं।

झारखंड और बिहार में मजदूरी दर 2020-21 में 194 रुपये से 4 रुपये बढ़कर 198 रुपये हो गई है। गुजरात में अगले वित्त वर्ष के लिए 5 रुपये की बढ़ोतरी 224 रुपये से 229 रुपये तक देखी गई है। वहीं तीन राज्यों में 6 रुपये की बढ़ोतरी देखी गई है। हिमाचल प्रदेश में 248 रुपये से 254 रुपये और पंजाब में 263 रुपये से 269 रुपये बढ़तरी देखी गई। जबकि चार पूर्वोत्तर राज्य अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा में 7 रुपये की वृद्धि देखी गई है। साथ ही आंध्र प्रदेश, मिजोरम, ओडिशा और तेलंगाना में 8 रुपये की वृद्धि दर्ज की गई है।