उत्तेजित पुलिस बल द्वारा एक ‘लापरवाह अभियान’ में प्रतिबंधित हाइनीवट्रेप नेशनल लिबरेशन काउंसिल (एचएनएलसी) के महासचिव चेरिस्टरफील्ड थंगख्यू को मार गिराया गया था, जिसने आत्मसमर्पण कर दिया था। यह बातें सेवानिवृत्त न्यायाधीश टी. वैफेई ने अपनी रिपोर्ट में कही है, जिसे विधानसभा में पेश किया गया। 

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एक सदस्यीय जांच आयोग की अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायाधीश टी. वैफेई ने की। उल्लेखनीय है कि 13 अगस्त, 2021 को राज्य की राजधानी के मावलाई किंटोन मस्सार इलाके में पुलिस की छापेमारी के दौरान थांगखिव की उनके घर में गोली लगने से मौत हो गई थी। पुलिस ने दावा किया था कि पूर्व उग्रवादी ने चाकू से हमला करने की कोशिश की। इसके बाद आत्मरक्षा में उसे गोली मारी गयी थी। थांगखिव की मौत के कारण व्यापक हिंसा हुई थी और भीड़ ने वाहनों में आग लगा दी थी तथा पुलिस से हथियार छीन लिए थे। वैफेई ने 28-पृष्ठ की अपनी रिपोर्ट में कहा, अभियान एक अच्छी तरह से तैयार की गई योजना थी, लेकिन इसे खराब, लापरवाही, जल्दबाजी और बिना दिमाग के उचित प्रयोग के अंजाम दिया गया। दूसरे शब्दों में, यह एक असफल अभियान था और मृतक को जीवित पकड़ने के अपने उद्देश्य में विफल रहा, जिसने पुलिस को प्रतिबंधित एचएनएलसी संगठन की विध्वंसक गतिविधियों के बारे में बहुमूल्य जानकारी दी होती।

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 आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मेघालय पुलिस की टैक्टिकल टीम- ढ्ढ ने एचएनएलसी के पूर्व उग्रवादी को उसके आवास से गिरफ्तार करने के लिए अभियान चलाया, जो विचारहीनता और बल के अत्यधिक उपयोग का पता चला है, जिसके कारण थांगखिव की मृत्यु हो गई। आयोग ने हालांकि कहा कि थांगखियू को पकड़ने या उसके आवास पर छापे मारने के लिए पर्याप्त खुफिया जानकारी थी, जिसके लिए पुलिस को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है। वह कथित रूप से जबरन वसूली, आपराधिक और विध्वंसक गतिविधियों में शामिल था। रिपोर्ट में कहा गया है कि उचित योजना के बिना और पर्याप्त सावधानी के अंधेरे में शेर की मांद में प्रवेश करने के बाद पुलिस ने पूरी तरह से परिहार्य और अनावश्यक जोखिम उठाया, जिससे उनके साथ-साथ मृतक के जीवन को भी खतरे में डाल दिया गया। रिपोर्ट में कहा गया, मृतक (थांगखियू) के घर में अंधेरे में जबरन प्रवेश और उसके बाद मृतक की हत्या एक लापरवाह कार्रवाई है और यह बल के अनुपातहीन उपयोग के समान है। इस वजह से अभियान शुरू करने का उद्देश्य विफल हो गया अर्थात् उसे ( थांगखियू) जीवित पकड़ने का मकसद पूरा नहीं हो सका। 

रिपोर्ट में कहा गया, मेघालय पुलिस की टैक्टिकल टीम- ढ्ढ ने जिस तरह से अभियान को अंजाम दिया, उसके बारे में आपराधिक अदालत फैसला करे। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए कई उपायों की सिफारिश की। आयोग ने कहा कि रात में एक आवासीय घर पर छापा मारने से बचना चाहिए, ताकि निर्दोष रहने वालों को नुकसान न पहुंचे। वैफेई आयोग ने सिफारिश की है कि पुलिस को आवासीय घरों पर छापेमारी करते समय नाइट विजन उपकरणों और आंसू गैस के हथगोले का इस्तेमाल करना चाहिए। साथ ही पुलिस को मानवाधिकारों के प्रति संवेदनशील बनाने और यह अनिवार्य करने का भी सुझाव दिया है और कहा है कि शहरी क्षेत्रों में इस तरह की छापेमारी के दौरान एम्बुलेंस पुलिस टीम का हिस्सा हो। इस बीच थांगखिव के भाई ग्रैनरी स्टारफील्ड थांगख्यू ने पूर्व उग्रवादी नेता की हत्या में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। ग्रेनेरी ने संवाददाताओं से कहा, सरकार को अब मेरे भाई (थांगख्यू) की हत्या में शामिल उन पुलिस कर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज करना चाहिए। सरकार को आगे की जांच के लिए मामले को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) यह मामला सौंपना चाहिए। उन्होंने कहा, अगर सरकार कार्रवाई करने में विफल रहती है, तो हम भी उसी के अनुसार अपना अगला कदम तय करेंगे। इससे पहले, सुर का ब्री यू हिनीवट्रेप (वॉयस ऑफ हाइनीवट्रेप पीपल) के सदस्यों ने वैफेई आयोग की रिपोर्ट को खारिज कर दिया और ने थांगखिव की हत्या में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए सरकार पर दबाव बनाने के लिए विधानसभा की ओर मार्च करने का प्रयास किया। डोनबोकलांग खारलिंगदोह कहा, हम रिपोर्ट को खारिज करते हैं। हम अपनी अगली कार्रवाई पर थांगखिव के परिवार के सदस्यों के साथ चर्चा करेंगे।