मेघालय में मलेरिया से होने वाली मौतों का आंकडा 2015 में 40 से घटकर 2021 में 3 रह गया है। इसी के साथ ही अब यह राज्य मलेरिया मुक्त होने वाला है। राज्य सरकार के अधिकारियों ने कहा कि 2017 के बाद से पिछले पांच वर्षों में पूरे राज्य में मलेरिया से केवल 27 मौतें हुई हैं।

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वेक्टर-जनित नियंत्रण को संभालने वाली टीम के एक वरिष्ठ चिकित्सक ने कहा, "हमने ग्रामीण स्तर पर बीमारियों का जल्द पता लगाने और सभी मामलों का पूरा इलाज करने के साथ-साथ उन क्षेत्रों में मच्छरदानी वितरित करने के साथ इस मील के पत्थर को हासिल करने में कामयाबी हासिल की है।" उन्होंने कहा कि मलेरिया की जांच नि:शुल्क है, दवाएं नि:शुल्क दी जाती हैं और भारत सरकार के राष्ट्रीय वेक्टर जनित कार्यक्रम के तहत मरीजों को मच्छरदानी भी मुफ्त मुहैया कराई जाती है।

1997 से 2019 तक राज्य की महामारी विज्ञान की स्थिति के विश्लेषण से पता चला है कि 2007 में मलेरिया से होने वाली मौतों की सबसे अधिक संख्या एक वर्ष में 237 मौतों के साथ दर्ज की गई थी और इसमें से 117 मौतें अकेले वेस्ट गारो हिल्स जिले में हुई थीं। राज्य के स्वास्थ्य विभाग को बीमारी को नियंत्रित करने के लिए "तुरा मॉडल" (तुरा जिला मुख्यालय होने के नाते) के रूप में पहचाने जाने वाले मॉडल को अपनाने के लिए प्रेरित किया है।

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बताया गया है कि आशा कार्यकर्ताओं की सक्रिय सहायता से शीघ्र पहचान और उपचार को प्राथमिकता दी गई। पहले वर्ष में ही 7,280 रोगियों का परीक्षण किया गया, जिनमें से 2,653 पॉजीटिव आए जिसके बाद उनका सफलतापूर्वक इलाज किया गया।