मेघालय के शिलांग निर्वाचन क्षेत्र के लोकसभा सांसद विन्सेंट पाला ने केंद्र से CBSE (केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड) पाठ्यक्रम में खासी और गारो भाषाओं को दूसरी भाषा के विकल्प के रूप में शामिल करने का आग्रह किया है। विंसेंट पाला ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक को पत्र लिखकर कहा है कि CBSE पाठ्यक्रम में खासी और गारो दोनों भाषाओं को शामिल किया जाना चाहिए क्योंकि मेघालय की लगभग 78 प्रतिशत आबादी इन दोनों भाषाओं को बोलती है।


पाला ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री को लिखे अपने पत्र में कहा कि "मेघालय की जनसंख्या (लगभग) 35 लाख है और 47% आबादी खासी बोलती है, 30.86 गारो बोलते हैं जबकि बाकी अन्य भाषाएं बोलते हैं। सीबीएसई पाठ्यक्रम में भाषाओं की नई प्रकाशित सूची के अनुसार, खासी और गारो भाषाओं को शामिल नहीं किया गया है, जबकि मिज़ो और तंगखुल जैसी भाषाएं, जो बहुत कम आबादी में बोली जाती हैं और इस्तेमाल की जाती हैं "।

पाला ने बताया कि " मिजो भाषा लगभग 12 लाख लोगों द्वारा बोली जाती है और तंगखुल बोलने वालों की संख्या 1.83 लाख है। खासी और गारो भाषाएं न केवल मेघालय राज्य के मूल निवासियों के लिए संचार का माध्यम हैं (मौखिक और लिखित दोनों) हैं, बल्कि पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों के निवासियों के बड़े वर्ग के लिए भी हैं, जिनके पास खासी और गारो वंश हैं। बांग्लादेश की एक बड़ी आबादी भी खासी और गारो भाषा बोलती है।”