कोरोना महामारी ने ना सिर्फ हमारे रहन-सहन बदला है बल्कि कई घटनाएं ऐसी हुई हैं जिन्हाेंने हमें हिलाकर रख दिया है। इन्हीं यादों और इनसे मिली सीख को लेकर दिल्ली के सिद्धार्थ दत्ता और अहमद सिद्दीकी ने अनोखी पहल की है। चार अक्टूबर को तीन लोगों ने मिलकर पूरे देश की यात्रा शुरू की थी। इसका नाम उन्होंने रोड आश्रम रखा था। 17 दिसंबर तक सिद्धार्थ दत्ता और अहमद 25 हजार किलोमीटर का सफर कर चुके हैं। इस दौरान वे देश के अलग-अलग लाेगों से मिले और उनके अनुभव सुनकर उन्हें डॉक्यूमेंट्री में उतारने का प्रयास किया।

सिद्धार्थ दत्ता ने बताया कि जब वे बंगाल के सुंदरवन में पहुंचे तो वहां की स्थिति देखकर हैरान थे। एक तरफ कोरोना का प्रकोप था तो दूसरी तरफ उसी समय वहां पर आए साइक्लोन ने भारी तबाही मचाई थी। यहां ह्यूमन ट्रैफिकिंग की भी बड़ी समस्या है। राजस्थान में ऐसे स्थान जहां परिवार में मात्र तीन लोग हैं और उनके आस-पास कोई व्यक्ति नहीं रह रहा है। कारण पूछा तो पता चला कि सूखा पड़ने के कारण स्थानीय लोग घर छोड़कर जा चुके हैं। गरीबी के कारण वह परिवार वहां रह रहा था।

मेघालय के ऐसे गांव में भी पहुंचे जहां पर एयरपोर्ट है, लोगों के पास मोबाइल फोन और गाड़ी है लेकिन नेटवर्क नहीं है। यदि किसी ने फोन पर बात करनी है तो घर से 50 किलाेमीटर दूर गाड़ी को ड्राइव करके आना होगा।

रोड आश्रम की यात्रा पर निकले अहमद सिद्दीकी और सिद्धार्थ के पास अनोखे पेंट वाली गाड़ी है जिसमें तिरंगे के अलावा अलग-अलग प्रसिद्ध स्थानों काे उकेरा गया है ताकि विविधता में एकता नजर आ सके।